भीषण गर्मी में  हीट इक्सासन, हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ा

बॉडी के नेचुरल कूलिंग सिस्टम पर पड़ रहा असर

 जिला अस्पताल में  70 फीसदी मरीजों में साइलेंट हीट लीड की प्रॉब्लम

मेडिकल कॉलेज में 70 से 72 फीसदी मरीज कमजोरी की समस्या से ग्रस्त 

 मेरठ। मानसूम के मौसम में कम बरसात होने से उभस व भीषण गर्मी ने परेशान कर दिया है। 39 डिग्री सेल्सियस के तापमान ने पसीने छुड़ा दिए हैं। ऐसी गर्मी में हीट क्रैप, हीट इक्सासन, हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि इन दिनों जांच में मरीजों को न बुखार मिल रहा है न ही कोई बड़ी बीमारी सामने आ रही है। फिर भी वे खुद को सामान्य महसूस नहीं कर पा रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है इन समस्याओं के पीछे स्टक हीट इफेक्ट वेदर पैटर्न जिम्मेदार है। इसे साइलेंट हीट लौड या वर्मल फटीग भी कहते हैं। 

जिला अस्पताल की बात करें तों  इन दिनों ओपीडी 1500 से 2500 तक पहुंच रही है। जिनमें 70 फीसदी मरीजों में साइलेंट हीट लीड की प्रॉब्लम नजर आ रही है। वहीं, मेडिकल कॉलेज में इन दिनों ओपीडी में 3000 से 3500 तक मरीज पहुंच रहे हैं। यहाँ भी लगभग 70 से 72 फीसदी मरीज इसी समस्या से ग्रस्त है। उधर प्राइवेट हॉस्पिटल में भी साइलेंट हीट लौड की समस्या के मरीज पहुंच रहे हैं।

गर्मी का असर रात में दिखाई दे रहा 

यह समस्या सिर्फ दिन की गमों की नहीं है।  रात में भी लोगों को पूरी राहत नही मिल रही।दिनभर गर्म हुई सड़के, मकान और कंक्रीट रात में भी गर्मी छोडते रहते है। इस नाइटटाइम हीट रिटेंशन की वजह से कई लोग सुबह उठने के बाद भी फ्रेश महसूस नहीं कर रहे शरीर को जितनी रिकवरी रात में मिलनी चाहिए, उतनी नहीं मिल पा रही। नतीजा, अगले दिन थकान और भारीपन पहले से ज्यादा महसूस हो रहा है। 

बीमारी का संकेत

चिकित्सकों  का कहना है कि यह जरूरी नहीं कि हर थकान किसी बीमारी का संकेत हो। कई बार मौसम का दबाव भी शरीर पर असर डालता है। ये थर्मल फटीग सिंड्रोम का शुरुआती रूप है। जिसमें शरीर लगातार गर्मी के दबाव से ऊर्जा खोने लगता है और बॉडी बीमार होने का मैसेज भेजती है। 

ये लक्षण आ रहे सामने

लगातार थकान, शरीर में भारीपन, सिर दर्द, चिड़चिड़ापन, काम में एकाग्रता की कमी, ज्यादा पसीना आना, कमजोरी महसूस होना, नींद पूरी होने के बाद भी सुस्ती

एक्सेसिव थकान की वजह ह्यूमन हीट बर्डन

  सीएमओ डा. राम प्रसाद ने बताया मौसम में इस समय एक ऐसी स्थिति बनी हुई है जिसमें दिनभर गर्मी रहती है, लेकिन हवा की गति कम होने के कारण शरीर की प्राकृतिक राहत नहीं मिल पाती। सामान्य परिस्थितियों में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा करता है। लेकिन जब हवा ठहर जाती है ती पसीना तेजी से सूख नहीं पाता और शरीर की नेचुरल कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने लगती है। ये ह्यूमन हीट बर्डन है यानी शरीर लगातार गर्मी का दबाव झेलता रहता है। भले ही व्यक्त्ति की इसका अहसास तुरंत न हो। इसकी वजह से बॉडी में टेंपरेचर मेटेन करने के लिए एक्स्ट्रा मेहनत करनी पड़ती है और लोग बहुत ज्यादा थकान महसूस करते हैं।

मेडिकल कॉलेज के  मेडिसिन डिपार्टमेंट, प्रो. डा. अरविंद कुमार ने बताया कि इन दिनों ओपीडी में कमजोरी, थकान और डिहाइड्रेशन जैसी शिकायतों वाले मरीज बढ़ रहे हैं। कई मामलों में कोई गंभीर बीमारी नहीं मिलती, लेकिन शरीर गर्मी के लगातार दबाव का असर दिखा रहा होता है।

ऑफिस से घर तक असर

सिर्फ बाहर काम करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि ऑफिस और घरों में रहने वाले लोग भी इस स्थिति से प्रभावित हो रहे है। एयर कंडीशनर और कूलर से निकलकर बार-बार गर्म वातावरण में जाने से शरीर की तापमान के बदलाव से तालमेल बैठाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा लंबे समय तक स्क्रीन देखने, कम पानी पीने और अनियमित दिनचर्या से भी थकान बढ़ रही है। मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि मौसम का असर सिर्फ शरीर पर नहीं, मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है। 

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