मिलावट और उपभोक्ता

राजीव त्यागी 

शुद्ध खाद्य पदार्थों को प्राप्त करना किसी भी उपभोक्ता का अधिकार है, लेकिन खाद्य पदार्थों की शुद्धता लगता है कि दूर की कौड़ी हो गई है। खाद्य पदार्थों में मिलावट आजकल एक गंभीर समस्या बन गई है। कीटनाशकों के अवैज्ञानिक और अंधाधुंध इस्तेमाल से फल और सब्जियों के साथ-साथ भूूमिगत जल भी दूषित हो रहा है जिससे लोग कैंसर, लिवर, किडनी की गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। यह गंभीर चिंतन का विषय है। मिलावट का अर्थ है किसी भी ऐसे पदार्थ को मिलाना जिससे खरीददार संतुष्ट न हो या पदार्थ की गुणवत्ता खराब हो जाए।

 कोई भी वस्तु तभी शुद्ध मानी जाती है जब वह खाद्य सुरक्षा एवं सेवा प्राधिकरण के मानकों के तहत बनाई गई हों। कुछ लोग चंद पैसों की खातिर दूध, पनीर, खोया, अदरक-लहसुन, पेस्ट, मसाले, व्रत के आटे, काली मिर्च, हल्दी, नारियल तेल, शहद तथा मंदिरों में वितरित होने वाले प्रसाद आदि में मिलावट कर लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। फल, अनाज, सब्जी और दूध का उत्पादन बहुत बढ़ा है, परन्तु कीटनाशकों और जहरीले रसायनों के इस्तेमाल से सब्जियों और फलों के अलावा पर्यावरण और पीने का पानी भी दूषित हो रहा है, जिससे लोगों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा रहा है।

 प्रधानमन्त्री ने भी जनता से अपील की थी कि डाक्टर की सलाह के बगैर एंटीबॉयोटिक्स का सेवन न करें। डाक्टर को भी अति आवश्यक हो तो ही एंटीबॉयोटिक्स प्रिस्क्राइब करनी चाहिए क्योंकि रोगाणुरोधी प्रतिरोध भारत की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनता जा रहा है। परिणामस्वरूप सामान्य संक्रमणों का इलाज भी बहुत ही मुश्किल होता जा रहा है। सरकार को दवाइयों के रेट निर्धारित कर दवाई निर्माताओं तथा विक्रेताओं का लाभ कम करके उपभोक्ताओं का शोषण रोकना चाहिए। पैकेजिंग प्रोडक्ट के लेबलिंग पर वर्णित प्रोडक्ट के घटकों के लिए मजबूत नियामक ढांचा होना चाहिए। 

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण और राज्य खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण को समय-समय पर आडिट और रैंडम टेस्टिंग कर, उल्लंघन के लिए जुर्माना करना चाहिए। जिस देश में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बाजार में बहुतायत हो और कानूनों का सख्ती से पालन न हो, उस देश के नागरिक स्वास्थ्य की दृष्टि और आर्थिक तौर पर बहुत कमजोर होंगे, क्योंकि वे अस्पताल और दवाइयों के चक्र में फंसे रहते हैं। इसलिए खाद्य पदार्थों में मिलावट से संबंधित कानूनों और जांच की वैज्ञानिक तकनीकों के बारे में जागरूकता जरूरी है।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts