आंसुओं के बीच शहीद जनेश्वर को अंतिम विदाई

पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलखी पत्नी, 9 वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि

मेरठ।हिमाचल प्रदेश के शिमला में सड़क हादसे में घायल होने के बाद शहीद हुए भारतीय सेना के जवान जनेश्वर कुमार का पार्थिव शरीर शुक्रवार सुबह उनके पैतृक गांव रछौती पहुंचा। पार्थिव शरीर घर पहुंचते ही पूरा गांव गम में डूब गया। पत्नी नीतू ताबूत से लिपटकर फूट-फूटकर रो पड़ी और बार-बार कहती रही, "मुझे भी अपने साथ ले चलो।" इस दौरान वह बेहोश हो गईं। तीनों बच्चों का भी रो-रोकर बुरा हाल था।

दोपहर करीब 12 बजे शहीद की अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने भाग लिया। पूरे रास्ते "भारत माता की जय" और "शहीद जनेश्वर कुमार अमर रहें" के नारों से वातावरण गूंज उठा। गांव से करीब 200 मीटर दूर खेत में राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। शहीद के 9 वर्षीय बड़े बेटे हिमांशु ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। यह भावुक दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

जनेश्वर कुमार भारतीय सेना की कुमाऊं रेजीमेंट में नायक के पद पर तैनात थे और उनकी पोस्टिंग हिमाचल प्रदेश के शिमला में थी। एक जुलाई को गश्त के दौरान सेना का वाहन सड़क हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। सैन्य अस्पताल में उपचार के दौरान 15 जुलाई को उन्होंने अंतिम सांस ली।

शहीद का पार्थिव शरीर गुरुवार देर रात मेरठ पहुंचा था। शुक्रवार सुबह सेना के वाहन से उनके पैतृक गांव लाया गया, जहां अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम सलाम किया।

जनेश्वर वर्ष 2014 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और उत्कृष्ट सेवा के आधार पर दो वर्ष पूर्व उन्हें नायक के पद पर पदोन्नत किया गया था। वर्ष 2015 में उनका विवाह नीतू से हुआ था। वह अपने पीछे पत्नी, दो बेटे हिमांशु (9), लकी (4) और बेटी मान्या (6) सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके छोटे भाई प्रदीप भी भारतीय सेना में देश सेवा कर रहे हैं।

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