उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 लागू

 पुरानी इमारतों के कायाकल्प का रास्ता हुआ आसान

मेरठ, 21 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के शहरी क्षेत्रों में जर्जर और पुरानी इमारतों के पुनर्विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शहरी पुनर्विकास नीति-2026 लागू कर दी है। प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद द्वारा जारी इस नीति का उद्देश्य शहरी क्षेत्र को रोकना, भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना तथा आर्थिक विकास को गति देना है।

नई नीति के तहत 25 वर्ष या उससे अधिक पुरानी आवासीय योजनाएं, हाउसिंग सोसायटी, अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन तथा 1500 वर्ग मीटर या उससे अधिक क्षेत्रफल वाली योजनाएं पुनर्विकास के लिए पात्र होंगी। हालांकि, एकल भवन, फ्रीहोल्ड में परिवर्तित न हुई लीज भूमि तथा हेरिटेज जोन इस नीति के दायरे से बाहर रहेंगे। बंद अथवा प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के पुनर्विकास का भी प्रावधान किया गया है।

सरकार ने नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवास बंधु को राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाया है। पुनर्विकास कार्य तीन मॉडलों के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें शासकीय एजेंसियों द्वारा प्रत्यक्ष क्रियान्वयन, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) अथवा निजी डेवलपर के माध्यम से विकास तथा हाउसिंग सोसायटी या अपार्टमेंट एसोसिएशन द्वारा स्वयं पुनर्विकास शामिल है।

नीति के अनुसार, किसी भी आवासीय परियोजना के पुनर्विकास के लिए संबंधित हाउसिंग सोसायटी के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की सहमति आवश्यक होगी। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के साथ प्रभावित परिवारों के लिए ट्रांजिट आवास या किराए की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पुनर्विकास कार्य को तीन वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसे विशेष परिस्थितियों में अधिकतम दो वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।

ये हैं नीति के प्रावधान सरकार ने पुनर्विकास परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए कई रियायतें भी प्रदान की हैं। इनमें विकास शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट, भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट, बेसिक एफएआर (FAR) के अतिरिक्त 1.0 एफएआर निःशुल्क, पांच प्रतिशत अतिरिक्त व्यावसायिक क्षेत्रफल की अनुमति, ईडब्ल्यूएस एवं एलआईजी आवासीय कोटे से छूट तथा स्टांप ड्यूटी में राहत शामिल हैं।

कहां कहां पड़ेगा प्रभाव

नई नीति लखनऊ, मेरठ ,कानपुर, वाराणसी, आगरा सहित प्रदेश के सभी नगर निगमों, विकास प्राधिकरणों एवं विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरणों में लागू होगी। सरकार का मानना है कि इससे पुराने शहरी क्षेत्रों का आधुनिक ढंग से पुनर्विकास होगा, सुरक्षित एवं बेहतर आवास उपलब्ध होंगे, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तथा शहरों का संतुलित और सुनियोजित विकास सुनिश्चित होगा।

No comments:

Post a Comment

Popular Posts