यूपी, राजस्थान से महाराष्ट्र तक… 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को सुप्रीम कोर्ट का अवमानना नोटिस, जानिए क्यों
सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 2023 से 2025 के बीच 165 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया
नई दिल्ली, 28 जुलाई। सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत के आदेशों के बावजूद मैनुअल स्कैवेंजिंग और सीवर-सेप्टिक टैंक में उतरने से हो रही मौतों को रोकने में कथित विफलता पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस जारी किया है।
अदालत ने संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से जवाब मांगा है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सीवर और सेप्टिक टैंक में सफाई के दौरान लोगों की मौतें क्यों नहीं रुक रही हैं। अदालत ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
2023 से 2025 के बीच 165 मौतें
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 से 2025 के बीच 15 राज्यों में सीवर और सेप्टिक टैंक में उतरने के दौरान 165 लोगों की मौत दर्ज की गई। इनमें वर्ष 2023 में 65, वर्ष 2024 में 54 और वर्ष 2025 में 46 मौतें शामिल हैं।
20 अक्टूबर 2023 को दिए थे अहम निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 20 अक्टूबर 2023 को केंद्र सरकार, सभी राज्यों और स्थानीय निकायों को मैनुअल स्कैवेंजिंग पूरी तरह खत्म करने के निर्देश दिए थे। अदालत ने कहा था कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिसमें किसी व्यक्ति को सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए अंदर न उतरना पड़े।
अदालत ने सफाई कार्य में मशीनों के इस्तेमाल, पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने, हादसों की स्थिति में मुआवजा देने और जिम्मेदारी तय करने समेत कई निर्देश जारी किए थे।
इन 15 राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने जिन राज्यों के मुख्य सचिवों को अवमानना का नोटिस जारी किया है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, बिहार और झारखंड शामिल हैं।
अदालत ने संबंधित मुख्य सचिवों से यह बताने को कहा है कि अदालत के आदेशों के अनुपालन में कथित विफलता के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।
मुख्य सचिवों को ही क्यों भेजा गया नोटिस?
मुख्य सचिव राज्य सरकार के सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारियों में शामिल होते हैं। जब किसी राज्य में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में लगातार कमी सामने आती है, तो अदालत जवाबदेही तय करने के लिए मुख्य सचिव से सीधे जवाब मांग सकती है। इसका उद्देश्य सरकारी मशीनरी को अदालत के आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन कराने और जिम्मेदारी सुनिश्चित करना होता है।
क्या है कोर्ट की अवमानना?
किसी अदालत के आदेश या निर्देश का जानबूझकर पालन न करना या न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना अदालत की अवमानना के दायरे में आ सकता है। अवमानना मुख्य रूप से दो प्रकार की मानी जाती है—सिविल अवमानना और आपराधिक अवमानना।
सिविल अवमानना में अदालत के आदेश, निर्देश या रिट का जानबूझकर पालन न करना शामिल है, जबकि आपराधिक अवमानना में न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालना या न्याय प्रशासन को प्रभावित करने वाला आचरण शामिल हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा कदम से साफ है कि सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोकने और मैनुअल स्कैवेंजिंग खत्म करने के अपने निर्देशों के अनुपालन को लेकर अदालत अब राज्यों से जवाबदेही तय करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।


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