भू माफिया से मुक्त हुई 158 हेक्टेयर जमीन पर बनेंगे वन

-खेड़ी कलां में 130 और बधवा में 28 हेक्टेयर पर वन विभाग ने लिया कब्जा

-बंदरों के लिए कपि वन और अन्नपूर्णा वन का भी होगा निर्माण

मेरठ। भू-माफियाओं के खिलाफ चल रही कार्रवाई के सकारात्मक परिणाम अब पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी दिखाई देंगे। वन विभाग ने हस्तिनापुर क्षेत्र के गंगा तटीय क्षेत्र में स्थित खेड़ी कला में 130 हेक्टेयर और बधवा में 28 हेक्टेयर भूमि को अवैध कब्जाधारियों से मुक्त करा दिया है। इस जमीन पर अब अविरल धारा वन, कपि वन और अन्नपूर्णा वन नाम से वन क्षेत्र विकसित करने के लिए 2 लाख 83 हजार पौधों का रोपण किया जाएगा।

 क्षेत्रीय वन अधिकारी खुशबू उपाध्याय ने बताया लंबे समय से भू-माफियाओं ने  गंगा तटीय क्षेत्र में स्थित खेड़ी कला में 130 हेक्टेयर और बधवा में 28 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कब्जा किया हुआ था। जिसे विभाग ने मुक्त करा लिया है।  लंबे समय तक भू-माफिया के कब्जे में रही खेड़ी कलां और बधवा जमीन पर अब जल्द ही हरियाली दिखाई देगी। इसके लिए वन विभाग की ओर से व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। खेड़ी कलां में गंगा के तटीय क्षेत्रों में मुक्त कराई गई जमीन पर अविरल धारा नाम से वन विकसित किया जाएगा। यहां वन क्षेत्र विकसित होने से जहां गंगा की अविरल धारा को सुरक्षित रखने की दिशा में सफलता मिलेगी वहीं तटीय क्षेत्रों में होने वाले कटान से भी राहत मिल सकेगी।

अगले सप्ताह से शुरू होने वाले पौधारोपण की तैयारियां अंतिम चरण में चल रही हैं। भूमि को समतल करने के साथ ही गड्ढे खुदवा दिए गए है। सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराकर उसे जनहित और पर्यावरण संरक्षण कार्यों के लिए प्रयोग में लाया जाए। 

इसी कड़ी में हस्तिनापुर के कौरवान वन ब्लॉक और राजकीय पशुधन एवं कृषि प्रक्षेत्र में कपि वन और अन्नपूर्णा वन विकसित किए जाएंगे। वन विभाग की ओर से इन दोनों ही वनों में फलदार और कंदमूल वाले पौधे लगाने की योजना है, ताकि बंदरों को भोजन के लिए आबादी वाले क्षेत्रों का रूख नहीं करना पडे़। कपि वन और अन्नपूर्णा वन क्षेत्र विकसित होने से किसानों की फसल में होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी।

वन विभाग की ओर से हस्तिनापुर और मवाना क्षेत्र की विभिन्न नर्सरी में लगभग साढ़े छह लाख पौधे तैयार किए गए हैं। इनमें सहजन, नीम, पीपल, बरगद, अर्जुन, शीशम, खैर, जंगल जलेबी, पाकड़, आंवला, शहतूत, अमरूद, अनार, जामुन, अमलतास जैसे पाौधों की प्रजातियां शामिल हैं।

वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार हस्तिनापुर में पारंपरिक विधि और बीज रोपण विधि से वन क्षेत्र तैयार होगा। कौरवान वन ब्लॉक और राजकीय पशुधन एवं कृषि क्षेत्र में पारंपरिक विधि से लगभग 1.45 लाख और खादर क्षेत्र में बीज रोपण विधि से 1.37 लाख पौधे तैयार किए जाएंगे। इस प्रकार विभाग का हस्तिनापुर क्षेत्र में कुल 2.83 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित है।

वन अधिकारियों का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि पर विकसित होने वाले ये वन केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गंगा संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन, मिट्टी संरक्षण और वन्यजीवों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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