पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार बने HDFC बैंक के नए चेयरमैन
बोर्ड ने दी मंजूरी, अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद लिया गया फैसला
नई दिल्ली। कॉर्पोरेट और बैंकिंग जगत से इस वक्त की एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी (HDFC Bank) के शीर्ष प्रबंधन में बहुत बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने सोमवार को देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को बैंक का नया चेयरमैन नियुक्त करने के प्रस्ताव को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी है। बैंक द्वारा जारी एक रेगुलेटरी फाइलिंग के अनुसार, बोर्ड ने राजीव कुमार को चार साल के कार्यकाल के लिए बैंक का इंडिपेंडेंट डायरेक्टर (स्वतंत्र निदेशक) नियुक्त करने की मंजूरी दी है, जो 30 जून, 2026 से प्रभावी होगी। इसके साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अंतिम हरी झंडी मिलने के बाद कुमार को तीन साल के लिए बैंक का अंशकालिक (पार्ट-टाइम) चेयरमैन नियुक्त किया जाएगा।
राजीव कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1984 बैच के बेहद प्रतिष्ठित और अनुभवी पूर्व अधिकारी रहे हैं। अपने शानदार और बेदाग प्रशासनिक करियर के दौरान उन्होंने भारत सरकार के वित्त सचिव के रूप में देश की व्यापक वित्तीय और आर्थिक नीतियों को एक नई दिशा दी थी। वित्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं देने के बाद, उन्होंने भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण और गरिमामयी संवैधानिक पद की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली थी। बैंकिंग और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के जानकारों का मानना है कि राजीव कुमार के इस विशाल प्रशासनिक, नीतिगत और वित्तीय अनुभव का सीधा फायदा एचडीएफसी बैंक को अपने परिचालन को और अधिक पारदर्शी व मजबूत बनाने में मिलेगा।
पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से पैदा हुए संकट को संभालेगा नया नेतृत्व
एचडीएफसी बैंक का यह ऐतिहासिक फैसला एक ऐसे संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण समय पर आया है, जब बैंक पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में बना हुआ था। दरअसल, बैंक के पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने मार्च के महीने में कुछ गंभीर नैतिक चिंताओं (Ethical Concerns) का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अतनु चक्रवर्ती के इस अप्रत्याशित कदम के बाद बैंक को कई तरह की कानूनी समीक्षाओं, प्रशासनिक चुनौतियों और निवेशकों के कड़े सवालों का सामना करना पड़ा था। इस अचानक पैदा हुए शून्य को भरने और वैश्विक निवेशकों व शेयरधारकों के भरोसे को डिगने से बचाने के लिए बैंक बोर्ड ने बेहद सूझबूझ दिखाते हुए राजीव कुमार के नाम पर मुहर लगाई है।
सरकारी बैंकों के संकट काल में एनपीए (NPA) पर कसी थी नकेल, सुधारी थी बैलेंस शीट
एचडीएफसी बैंक ने राजीव कुमार की क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए कहा है कि जब कुमार ने साल 2017 से 2020 के बीच भारत सरकार के वित्तीय सेवा विभाग (DFS) के सचिव के तौर पर पद संभाला था, तब देश का बैंकिंग सेक्टर और विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSUs) बेहद बुरे दौर से गुजर रहे थे। उस समय बैंकों के पास बड़ी मात्रा में बिना पहचान वाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (NPA), भारी पूंजी की कमी, और इक्विटी व कर्ज के गलत इस्तेमाल जैसे गंभीर मुद्दे थे।
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एक कुशल रणनीतिकार के रूप में काम करते हुए राजीव कुमार ने मजबूत पॉलिसी और कड़े कार्यान्वयन के जरिए बैंकिंग प्रणाली की बैलेंस शीट को साफ-सुथरा और सुदृढ़ बनाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उन्होंने बैंकों में एनपीए की सही पहचान और उनके लिए प्रोविज़निंग को अनिवार्य बनाया, साथ ही इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत बड़े डिफॉल्टर्स और उधार लेने वालों की जवाबदेही तय की थी।
आरबीआई की औपचारिक मंजूरी के बाद शुरू होगा स्थिरता का नया दौर
सोमवार को बोर्ड की बैठक में लिए गए इस बड़े फैसले के बाद अब केवल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बैंक के शेयरधारकों की औपचारिक मंजूरी मिलना शेष है। केंद्रीय बैंक से हरी झंडी मिलते ही राजीव कुमार आधिकारिक तौर पर देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक के चेयरमैन पद का कार्यभार संभाल लेंगे। बैंकिंग विशेषज्ञों को पूरी उम्मीद है कि राजीव कुमार के आने से एचडीएफसी बैंक के भीतर न केवल स्थिरता और पारदर्शिता का एक नया अध्याय शुरू होगा, बल्कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस के स्तर पर भी बैंक नई ऊंचाइयों को छुएगा।


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