जलवायु परिवर्तन के कारण कमजोर मॉनसून की बड़ी चुनौती सूखे की आशंका

मेरठ। जलवायु परिवर्तन के कारण कमजोर मानसून रहने की आशंका व्यक्त की जा रही है जिसके कारण सूखे की आशंका भी मौसम विभाग द्वारा व्यक्त की गई है। इसी को देखते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अल नीनो प्रभाव के चलते मानसून में कमी को देखते हुए सूखे की आशंका से निपटने के लिए बैठक की। इसके पहले उन्होंने एक बैठक जून के प्रारंभ में भी की थी। तेज जून को आयोजित बैठक में 315 जिलों की पहचान की गई है, जो सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। इन जिलों में भी एक से 11 ऐसे हैं जहां सूखे का असर कहीं अधिक हो सकता है। निसंदेह, भार जैसे किसी प्रधान देश के लिए बारिश में कमी एक गंभीर चुनौती है। सूखी की आशंका केवल किसानों की ही समस्या नहीं बढ़ाएगी, बल्कि कमजोर फसल के नतीजे में अनाज के महंगे होने से आम आदमी भी प्रभावित हो सकता है। फसल उत्पादन में कमी को देखते हुए सरकार को खाद्य सुरक्…

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कमजोर मानसून और खेती पर मंडराते खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने अग्रिम और आपातकालीन तैयारियां शुरू कर दी है। संवेदनशील और कम सिंचाई वाले इसे ग्यारह जिलों के लिए विशेष जल प्रबंधन, कम पानी में पकने वाले वैकल्पिक बीजों की उपलब्धता एवं बिजली, पानी की सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम किया जा रहा है।कृषि मंत्री ने कहा कि हम खेत खाली नहीं रहने देंगे जितनी बात होगी उसी हिसाब से कोई न कोई फसल बोई जा सके।इसके हिसाब से केंद्र से सरकार तैयारी कर रही है

 कम बारिश से खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा असर

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक 2 जुलाई को समाप्त होने वाले सप्ताह तक मॉनसून ऐसे ही कमजोर रह सकता है। इसका असर खरीफ फसलों और संवेदनशील इलाकों पर पड़ेगा। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश के 315 जिलों में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। इससे खरीफ फसलों की बुआई पर पृथकूल असर पड़ सकता है।

देश में अब तक कुल खरीद क्षेत्र का करीब 10% हिस्सा ही बोया गया है बाईस जून तक खरीफ फसलों का कुल रखवा 1.17 करोड़ हेक्टेयर रहा, हालांकि यह पिछले वर्ष की समान अवधि 1.13 करोड़ हेक्टेयर से थोड़ा अधिक है, लेकिन पानी की कमी से आगे की बुआई और बोई जा रही फसलों के अस्तित्व पर संकट मंडरा रहा है। सरकार द्वारा एक से 11 जिलों को अतिसंवेदनशील के रूप में चिह्नित कर लिया है, यानी कि इन जिलों में कमजोर मानसून की सबसे अधिक

मांग पड़ेगी क्योंकि वहां सिंचाई की शुभा 25% से भी कम है और वे बारिश…

 जून का महीना लगभग खत्म होने के कगार पर पहुंच गया है। दक्षिण-पश्चिम मानसून का पहला महीना खत्म होने में सिर्फ एक सप्ताह ही बचा है, लेकिन अब तक बीता यह सीजन देश के अन्नदाताओं और अर्थव्यवस्था के लिए सूखे जैसी बड़ी चुनौती लेकर आया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक एक से 22 जून तक देशभर में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश हुई है। मानसून की स्थिति में अगर तुरंत सुधार नहीं हुआ तो देश के प्रमुख कृषि राज्यों में खरीफ की खेती पर तगड़ी मार पड़ सकती है। इसमें न सिर्फ ग्रामीण इलाकों में मांग प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य महंगाई कर खतरा भी तेजी से बढ़ेगा। हमारे देश में सबसे ज्यादा खरीद उत्पादन करने वाले महाराष्ट्र में सामान्य से 82 प्रतिशत और गुजरात में 75 प्रतिशत कम बारिश हुई है छत्तीसगढ़ में 69 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 52 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है वहीं झारखंड में सामान्य से 66 प्रतिशत उड़ीसा में 48 प्रतिशत और बिहार, उत्तर प्रदेश एवं तेलंगाना में 43 - 43 कम्पानी वर्षा है दक्षिण भारत के कर्नाटक में 40 प्रतिशत और केरल में 28 फीसदी कम बारिश हुई है, जिससे चिंता बढ़ गई है, इससे देश पर सूखे का साया और महंगाई भरने की आशंका व्यक्त की जा रही है। नहीं बुवाई में देरी होगी जिससे उत्पादन प्रभावित होगा, इसलिए अब पछताए होत, क्या जब चिड़िया चुक गई खेत वाली लाइनें  चरतार्थ होंगी इसलिए, समय पर सभी कदम उठाए जाने चाहिए और कम पानी में उगने वाली फसलों के बीज किसानों को उपलब्ध कराने का प्रयास होना चाहिए तथा जल संरक्षण की तकनीक और उपायों के बारे में किसानों की सहायता करनी चाहिए

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