बैंक ऑफ इंडिया प्रबंधन के खिलाफ बैंक कर्मियों का हल्लाबोल

 30 जून को उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में बड़े आंदोलन की चेतावनी

मेरठ।  बैंक ऑफ इंडिया (BOI) में कर्मचारियों की समस्याओं और प्रबंधन के कथित तानाशाही रवैये को लेकर औद्योगिक अशांति की स्थिति पैदा हो रही है। उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन (UPBWO) ने लखनऊ अंचल के उच्च प्रबंधन को 'चेतावनी एवं आंदोलन' नोटिस जारी कर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो आगामी 30 जून 2026 को पूरे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में बैंक की मुख्य शाखाओं, क्षेत्रीय कार्यालयों और अंचल कार्यालयों का ऐतिहासिक घेराव और विशाल धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन और भेदभाव का आरोप

उत्तर प्रदेश बैंक वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन (UPBWO) के महामंत्री अनुज त्यागी ने बताया कि सहयोगी यूनियन 'बैंक ऑफ इंडिया वर्कर्स ऑर्गनाइजेशन (BOIWO)' ने प्रबंधन के समक्ष एक मांग पत्र प्रस्तुत किया था। जिसमें कर्मचारियों के स्थानांतरण, द्विपक्षीय समझौतों के उल्लंघन और महिला कर्मचारियों के लिए पृथक शौचालय जैसी बुनियादी व न्यायसंगत मांगें उठाई गई थीं।  आरोप है कि बैंक का शीर्ष प्रबंधन एक निष्पक्ष नियोक्ता की भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रहा है और यूनियनों के बीच खुद एकपक्षीय पार्टी बनकर काम कर रहा है। 

वैचारिक तुष्टीकरण और दमनकारी नीतियों का विरोध

मेरठ जिले के यूनियन अध्यक्ष  ब्रिजेश सिंह का आरोप है कि बैंक के भीतर प्रशासनिक गरिमा को ताक पर रखकर एक खास वर्ग को अनुचित लाभ दिया जा रहा है और वामपंथी विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है।  वहीं दूसरी ओर, 'राष्ट्रहित में उद्योग, उद्योग हित में श्रमिक' का मूल विचार रखने वाली राष्ट्रवादी विचारधारा का संगठित रूप से दमन किया जा रहा है।  संगठन ने कहा है कि किसी भी लोकतांत्रिक देश के प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम (PSU) में इस तरह का वैचारिक तुष्टीकरण और पक्षपातपूर्ण रवैया कतई स्वीकार्य नहीं हो सकता। 

'बुद्धि शुद्धि' के लिए अनूठा आध्यात्मिक प्रतिरोध

आंदोलन के तरीके को लेकर संगठन ने एक अनूठी रणनीति तैयार की है।  यूनियन के अनुसार, आगामी  30 जून को होने वाला यह विरोध प्रदर्शन पूरी तरह लोकतांत्रिक और भारतीय मूल्यों के अनुरूप होगा. इस दौरान बैंक कर्मी उच्च प्रबंधन की "बुद्धि के शुद्धिकरण" के लिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के भजन और कीर्तन करेंगे, ताकि प्रबंधन को अपने कर्मचारियों के प्रति न्याय करने की सद्बुद्धि प्राप्त हो सके। 

अशांति और ग्राहक सेवा प्रभावित होने पर प्रबंधन होगा जिम्मेदार

मेरठ के नागाबाबा ट्रस्ट सूरजकुंड में एक संयुक्त मीटिंग में यूनियन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि प्रबंधन ने अपनी हठधर्मिता नहीं त्यागी और वार्ता के माध्यम से समय रहते समाधान नहीं निकाला, तो राज्यव्यापी आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी औद्योगिक अशांति या ग्राहक सेवा में व्यवधान के लिए पूरी तरह से बैंक ऑफ इंडिया का उच्च प्रबंधन जिम्मेदार होगा. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संगठन ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस विभाग और औद्योगिक विवाद अधिनियम के तहत संज्ञान लेने हेतु क्षेत्रीय श्रम आयुक्त को भी पत्र की प्रतिलिपि भेज दी है।

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