कपसाड़ कांड का आरोपी पारस सोम बालिग घोषित, मुख्य जेल में होगा शिफ्ट

वारदात के समय 18 वर्ष, 7 माह, 26 दिन उम्र,

मेरठ।  मेरठ के कपसाड कांड के आरोपी पारस सोम को जेजे बोर्ड ने बालिग घोषित कर दिया है। मेडिकल रिपोर्ट के आंकलन के बाद पारस सोम की उम्र वारदात के वक्त 18 साल, 7 महीने और 26 दिन निकलकर आई है। अब उसे मुख्य जेल में शिफ्ट किया जाएगा । प्रतिवादी पक्ष के लिए इसे बड़ा झटका माना जा रहा है। केस की आगे की कार्रवाई भी अब जेजे बोर्ड में ना होकर मुख्य न्यायालय (एससी/एसटी कोर्ट) में होगी।

 बता दें सरधना थाना क्षेत्रांतर्गत स्थित ग्राम कपसाड़ में इस साल  8 जनवरी को खेत पर काम कर रही एक दलित युवती रूबी को अगवा कर लिया गया। आरोप इसी गांव के युवक पारस सोम पर लगे, जिसने वारदात के वक्त युवती की मां सुनीता को गंभीर रूप से घायल कर दिया। अस्पताल में सुनीता की मौत हो गई, जिसके बाद गांव में तनाव फैल गया।

कई माह तक गांव में फोर्स तैनात

जिस युवती को अगवा किया गया, वह अनुसूचित जाति से थी। पुलिस ने 48 घंटे के भीतर युवती को सकुशल बरामद करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में सलाखों के पीछे भेज दिया जबकि युवती काउंसलिंग के बाद परिजनों के साथ घर लौट गई। हालांकि 25 मार्च को आरोपी को बाल संप्रेक्षण गृह में शिफ्ट कर दिया गया। करीब एक माह तक गांव में फोर्स तैनात रखा गया था।

आरोपी के नाबालिग होने का किया दावा

आरोपी की गिरफ्तारी के बाद तीन अधिवक्ताओं बलराम सोम, संजीव कुमार राणा व विजय शर्मा के पैनल ने दावा किया कि आरोपी वारदात के वक्त नाबालिग था, जिस कारण इस केस की सुनवाई जेजे बोर्ड (किशोर न्याय बोर्ड) के समक्ष होनी चाहिए। उन्होंने 14 जनवरी को याचिका दायर की। 22 जनवरी को याचिका मंजूर करते हुए नोटिस जारी किए गए।

आरोपी की उम्र को लेकर फंसा पेच

कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई शुरु की, जिसमें उम्र को लेकर पेच फंसता चला गया। प्रतिवादी पक्ष ने आरोपी की हाईस्कूल की मार्कशीट व पांचवीं की टीसी प्रस्तुत की, जिसमें उसकी जन्म तिथि 11 मई, 2008 रही। इसके अनुसार आरोपी लगभग साढ़े सत्रह वर्ष का था। वादी पक्ष ने आपत्ति दायर की और सर्टिफिकेट में हेरफेर का आरोप लगाया।

जेजे बोर्ड में याचिका हुई ट्रांसफर

तारीख पर तारीख लगती रही लेकिन उम्र पर निर्णय नहीं लिया जा सका। 9 फरवरी को कोर्ट ने यह मामला जेजे बोर्ड ट्रांसफर कर दिया। वर्तमान में जेजे बोर्ड उम्र से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा है। 7 मई को जेजे बोर्ड ने आरोपी की उम्र निर्धारित करने के लिए चिकित्सीय परीक्षण कराये जाने के आदेश कर दिए।

आदेश के विरूद्ध डाली गई याचिका

जेजे बोर्ड ने 7 मई को आरोपी के चिकित्सीय परीक्षण के आदेश किए थे, जिसका प्रतिवादी पक्ष के अधिवक्ता बलराम सोम ने विरोध किया। उन्होंने इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय में क्रिमिनल अपील दायर की। 16 पन्नों की इस अपील में बलराम सोम ने पांच रूलिंग भी पेश की है, जिसमें उम्र निर्धारण के लिए हाईस्कूल सर्टिफिकेट को ही महत्व दिया गया था।

5 माह के बाद आया उम्र पर निर्णय

8 जनवरी की यह घटना थी और 14 जनवरी को प्रतिवादी पक्ष ने याचिका दायर की थी। दोनों पक्षों की तरफ से मजबूत दावेदारी की गई। बलराम सोम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट की कई रूलिंग पेश की जबकि वादी पक्ष ने मेडिकल को महत्व दिया। कई याचिका दायर हुई लेकिन जेजे बोर्ड ने आरोपी पारस सोम के मेडिकल को ही महत्वपूर्ण माना। तीन दिन पहले उन्होंने फैसला सुरक्षित कर लिया।

मेडिकल में 19 वर्ष आई पारस की उम्र

जेजे बोर्ड के आदेश पर पारस सोम का 12 मई को मेडिकल कराया गया। मेडिकल में पारस सोम की उम्र निकलकर 19 वर्ष आई। क्योंकि यह परीक्षण वारदात के चार माह चार दिन बाद हुआ था, इसलिए मेडिकल में वारदात के वक्त की उम्र 18 वर्ष 7 माह 26 दिन निकलकर आई। पारस सोम के बालिग साबित होने के बाद जेजे बोर्ड ने प्रतिवादी पक्ष की अपील को खारिज कर दिया। किशोर न्याय बोर्ड ने स्पष्ट किया कि पारस सोम का जांच में नाबालिग होना नहीं पाया गया है।

पीड़ित पक्ष बोला- न्याय की उम्मीद बढ़ी

जेजे बोर्ड द्वारा पारस की याचिका खारिज किए जाने के बाद पीड़ित पक्ष की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। रूबी के भाई नरसी ने कहा कि उन्हें न्याय प्रक्रिया पर पूर्ण भरोसा था। जो निर्णय आया है, वह उससे संतुष्ट हैं। उम्मीद है कि जल्द आरोपी को सजा भी होगी। इसी के बाद मां की आत्मा को शांति मिलेगी।

वादी अधिवक्ता बोले- कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे

वादी अधिवक्ता राजेंद्र कुमार ने कहा कि पहले दिन से न्यायालय को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा था। हमे पहले ही कह चुके थे कि आरोपी बालिग है और यह साबित भी हो जाएगा। जेजे बोर्ड ने न्याय किया है। जितना समय याचिका पर निर्णय में आया, उतना समय 19 वर्ष से कम कर दिया गया है। हमारा प्रयास होगा कि आरोपी पारस सोम को कड़ी से कड़ी सजा हो।

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