त्रिपुरा वन विभाग के अधिकारियों का  ड्रोन पायलट प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न

मेरठ। कुलपति प्रो. (डॉ.) त्रिवेणी दत्त की प्रेरणा एवं दूरदर्शी नेतृत्व में कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (SVPUAT), मेरठ द्वारा ड्रोनवर्स एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से त्रिपुरा सरकार के वन विभाग के अधिकारियों के लिए आयोजित रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC) प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 8 जून से 13 जून 2026 तक आयोजित किया गया।

इस छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में त्रिपुरा वन विभाग के 33 वन रक्षक एवं वनपाल  ने भाग लिया और सफलतापूर्वक प्रमाणित ड्रोन पायलट प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण का उद्देश्य वन अधिकारियों को आधुनिक ड्रोन तकनीक एवं उसके व्यावहारिक उपयोगों से परिचित कराना तथा उन्हें वन संरक्षण एवं निगरानी कार्यों के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना था।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को ड्रोन नियम एवं विनियम, उड़ान सुरक्षा, एयरस्पेस प्रबंधन, मिशन प्लानिंग, एरियल सर्वेक्षण, मैपिंग, डेटा संग्रहण एवं विश्लेषण, आपातकालीन प्रक्रियाओं तथा ड्रोन संचालन से संबंधित विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी प्रदान की गई। साथ ही व्यावहारिक उड़ान सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक परिस्थितियों में ड्रोन संचालन का अनुभव भी कराया गया।

समापन समारोह के अवसर पर कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, एसवीपीयूएटी, मेरठ के डीन प्रो. जयवीर सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि ड्रोन तकनीक आज विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभा रही है तथा वन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण में इसकी उपयोगिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर शुभकामनाएँ दीं। डॉ. आर. के. कुमावत, प्रभारी अधिकारी, ड्रोन सेंटर ने छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का विवरण प्रस्तुत करते हुए प्रतिभागियों को प्रदान किए गए सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण की जानकारी साझा की। इस अवसर पर डॉ. पी. के. सिंह, नोडल अधिकारी, डॉ. विकास सिंह, प्रभारी अधिकारी, त्रिपुरा वन विभाग के भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी श्री अरुण कुमार, सहायक वन संरक्षक (ACF) श्री पल्लब चक्रवर्ती एवं रेंज अधिकारी श्री सुमन भौमिक उपस्थित रहे। उन्होंने ड्रोन तकनीक को वन संरक्षण एवं निगरानी के लिए उपयोगी बताया। समारोह में ड्रोन सेंटर के प्रशिक्षक इन्द्रजीत, अलका एवं अमित भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी 33 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण करने पर प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम तकनीकी कौशल विकास, क्षमता निर्माण तथा सरकारी संस्थानों में ड्रोन तकनीक के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह पहल भारत में वन संरक्षण एवं पर्यावरण प्रबंधन के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग को भी दर्शाती है।


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