अमेरिका और ईरान के बीच करीब चार महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए सहमति बनी 

ईरान को 300 अरब डॉलर की मदद और प्रतिबंधों में छूट मिलेगी 

वाशिंगटन/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच करीब चार महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक प्रारंभिक समझौते पर सहमति बनी है। इस समझौते के तहत ईरान को कई बड़ी राहतें मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि, समझौते के सभी बिंदुओं की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने 14 पॉइंट्स वाले प्रस्ताव की जानकारी दी है।

ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका और उसके सहयोगी देश ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की मदद देंगे। इसके अलावा विदेशों में फंसे ईरान के 24 अरब डॉलर भी जारी किए जाएंगे। मेहर न्यूज के मुताबिक, अंतिम बातचीत शुरू होने से पहले ही इस राशि का एक बड़ा हिस्सा ईरान को दिया जा सकता है। मसौदे में यह भी कहा गया है कि ईरानी तेल और ऊर्जा क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों को हटाया जाएगा। इससे ईरान फिर से दुनिया के देशों को खुलकर तेल बेच सकेगा और उसकी कमाई बढ़ेगी।

इधर, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने भी कहा है कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर तय शर्तों का पालन करता है तो वे प्रतिबंधों में राहत देने के लिए तैयार हैं।समझौते के तहत अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान के बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा. बदले में ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से जहाजों के लिए खोल देगा। मसौदे में यह भी शामिल है कि अमेरिका ईरान के अंदरूनी मामलों में दखल नहीं देगा, ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी नहीं बढ़ाएगा और बातचीत के दौरान नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा।

मेहर न्यूज के मुताबिक, ईरान ने शर्त रखी है कि अंतिम और औपचारिक बातचीत तभी शुरू होगी जब उसकी फ्रीज की गई संपत्तियों का कम से कम आधा हिस्सा जारी कर दिया जाए, तेल प्रतिबंधों में राहत मिल जाए और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हट जाए।रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दिलाने की कोशिश होगी।

कई बड़े मुद्दों पर फंसा पेंच

हालांकि अभी कई बड़े मुद्दे पूरी तरह हल नहीं हुए हैं.। अमेरिका चाहता है कि ईरान लंबे समय तक परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे, जबकि ईरान प्रतिबंधों से राहत और अपनी पूरी फंसी हुई रकम वापस चाहता है। इसलिए आने वाले 60 दिनों की बातचीत दोनों देशों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। 

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