राम मंदिर का चढ़ावा आखिर कहां गया?
शक के घेरे में ये 5 बड़े किरदार, 15 महीने से चल रहा था खेल!
अयोध्या । योध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की रकम और जेवरात के गबन के आरोपों ने देशभर में हलचल मचा दी है। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में अब जांच तेज हो गई है। विवाद उस समय और गहरा गया, जब चढ़ावे की राशि में हेराफेरी और गबन के आरोप सामने आए। हालांकि अभी तक किसी भी आरोप की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए योगी सरकार ने 3 सदस्यीय SIT टीम का गठन किया है, जिसने अयोध्या पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। जांच शुरू होने के बाद जिन लोगों के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं, उनमें अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अवनीश और करुणे शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, चढ़ावे की रकम की गिनती और प्रबंधन से जुड़े होने के कारण इन लोगों की भूमिका जांच के दायरे में आई है। सूत्रों के मुताबिक, SIT ने लवकुश को हिरासत में लिया है।
कौन है अनुकल्प मिश्रा?
सूत्रों के मुताबिक, अनुकल्प मिश्रा मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने वाली टीम का हिस्सा था। जांच एजेंसियां उसके वित्तीय लेन-देन और हाल के वर्षों में खरीदी गई संपत्तियों की जांच-पड़ताल कर रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा रही है कि बीते कुछ समय में अनुकल्प की जीवनशैली और खर्च करने के तरीके में बड़ा बदलाव देखने को मिला था। आरोप हैं कि उसने कई जगहों पर संपत्तियां खरीदीं। टीम जब अनुकल्प मिश्रा के घर पहुंची तो परिवार के सदस्यों ने कैमरे पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।
लवकुश मिश्रा पर भी जांच एजेंसियों की नजर
अनुकल्प मिश्रा की तरह लवकुश मिश्रा भी चढ़ावे की रकम की गिनती करने वाली टीम का हिस्सा बताया जा रहा। जानकारी के अनुसार, उसे करीब छह महीने पहले ही यह जिम्मेदारी मिली थी। जांच के दौरान उसके घर पर तलाशी ली गई, जहां से करीब 10 लाख रुपए बरामद हुए। लवकुश मिश्रा के परिवार ने स्वीकार किया कि कुछ लोग उनके घर जांच के लिए आए थे। कुछ नकदी अपने साथ ले गए हैं। परिवार का कहना है कि पिछले 10 दिनों से लवकुश घर नहीं आया है। उससे संपर्क भी नहीं हो पा रहा है।
चर्चा के केंद्र में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
इन दोनों के बाद जिस तीसरे व्यक्ति की सबसे ज्यादा चर्चा है, वो है रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव। इसे ट्रस्ट का काफी पावरफुल व्यक्ति माना जाता था। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का खास सहयोगी है और चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराने का मैनेजमेंट रामशंकर यादव के ही जिम्मे था। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ वर्ष पहले तक इसकी पहचान एक ऑटो-रिक्शा चालक और चंपत राय के ड्राइवर और सहयोगी के रूप में थी।
राम शंकर यादव पर शक की सुई क्यों?
अयोध्या-लखनऊ में ₹50 करोड़ की संपत्ति का आरोप
अयोध्या एयरपोर्ट के पास 70 कमरों का हॉस्टल
3 रेस्टोरेंट में हिस्सेदारी का दावा.लखनऊ में संपत्ति और दो-मंजिला इमारत.
टोयोटा फॉर्च्यूनर भी संपत्तियों में शामिल.
हालांकि इन दावों की पुष्टि नहीं हो सकी है. टिन्नू यादव ने भी इस मामले में अभी कुछ नहीं कहा है.
15 महीने से चल रहा था हेराफेरी का खेल?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, जांच एजेंसियां इस संभावना की भी जांच-पड़ताल कर रही हैं कि चढ़ावे की रकम में कथित हेराफेरी का सिलसिला कई महीनों से चल रहा था। दावा किया जा रहा है कि मार्च 2025 के आसपास से दानपात्रों से निकलने वाली नकदी की गिनती के दौरान रकम में अनियमितताएं शुरू हुईं। यदि जांच में यह दावा सही साबित होता है तो यह सवाल और गंभीर हो जाता है कि इतनी लंबी अवधि तक किसी को इसकी जानकारी कैसे नहीं हुई?
सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद कैसे हुआ गबन?
राम मंदिर परिसर देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक परिसरों में गिना जाता है। यहां अत्याधुनिक CCTV कैमरे, सुरक्षा कर्मी और बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था मौजूद है। चढ़ावे की गिनती को भी बेहद संवेदनशील प्रक्रिया माना जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि हेराफेरी हुई तो वह इतने लंबे समय तक बिना किसी संदेह के कैसे चलती रही। जांच एजेंसियां अब गिनती की प्रक्रिया, CCTV रिकॉर्ड, बैंक जमा रिकॉर्ड और कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
अवनीश और करुणे की भूमिका भी जांच के दायरे में
अवनीश और करुणे नाम के दो अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की गई है। दावा किया जा रहा है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं और कुछ बरामदगियां भी इन्हीं की निशानदेही पर हुई हैं। हालांकि जांच एजेंसियों ने आधिकारिक रूप से किसी भी व्यक्ति की भूमिका पर टिप्पणी नहीं की है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद फिलहाल जांच के चरण में है। SIT मंदिर में चढ़ावे की गिनती, जेवरों के रिकॉर्ड, बैंक जमा प्रक्रिया और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल कर रही है।
इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल की गई है, जिसमें CBI से जांच कराने और FIR दर्ज करने की मांग की गई है। फिलहाल ट्रस्ट की ओर से किसी थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। SIT की जांच शुरू होने से पहले ही दो करोड़ रुपए की रिकवरी हो चुकी है। हालांकि, जांच के सबसे अहम सवाल का जवाब अभी नहीं मिला है। सवाल ये है कि क्या इतना बड़ा खेल सिर्फ पांच कर्मचारियों के बूते संभव था? दान राशि की गिनती के दौरान कई कर्मचारी, पदाधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी मौजूद रहते हैं। ऐसे में करोड़ों रुपये का लगातार गायब होना और किसी को संदेह तक न होना कई नई आशंकाओं की ओर इशारा कर रहा है।


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