...तेरा तुझको अर्पण !


- ललिता जोशी
आजकल भगवान बहुत चर्चा में हैं । अरे चर्चा में वो भी हमारे आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम । वैसे भगवान तो हमेशा ही भक्तों के जिव्हा पर ही रहते हैं । भक्त नाम जप करते रहते हैं और भगवान से अपने और अपने परिवार के लिए आशीर्वाद मांगते हैं ताकि वो सभी ईश्वर की कृपा से सुरक्षित और स्वस्थ रहें और बुरी बलाएँ इनका बाल भी बांका न कर पाएँ। ये सभी भक्त भगवान की भक्ति पूरी शिद्दत के साथ करते हैं । अपनी मन्नतें पूरी करने के लिए ईश्वर के साथ चढ़ावे की मांडवाली करते हैं । ये सब भक्त बड़ी ही ईमानदारी से करते हैं । अपने देश के मंदिरों में भगवान भक्तों के चढ़ावों से मलामाल  हैं । भगवान के मूर्ति स्वरूप को मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित कर विराजमान किया जाता है । इसीलिए सजीव ईश्वर को भक्त बड़े ही मनोयोग से अपना मानते हैं और अपनी नवधा भक्ति से ईश्वर को प्रसन्न करते हैं ।
आजकल देश में धर्मरस से साराबोर भक्त भगवान के दिव्य दर्शनों के लिए मंदिरों में जाते हैं । हमारे यहाँ पर बहुत ही दिव्य और भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ है और हो रहा है । भक्तों को भगवान के ये दिव्य और भव्य निवास बहुत ही प्रफुल्लित कर रहे हैं । ट्रांसपोर्ट की सुलभता और कोरोना के कारण मृत्यु का साक्षात्कार कर दूसरा जीवन पाने के बाद सभी धर्मों के अनुयायी अपने -अपने भगवान के दर्शनों के लिए उत्कट रहते हैं ।भक्त तो अपने भगवान को माया अर्पित करते हैं किन्तु भगवान तो भाव के भूखे हैं । हमने बचपन में अपनी दादी -नानी से न जाने कितनी अनगिनत कहानियाँ सुनी हैं जिसमें भक्तों ने भगवान को बेर और चीवड़े के भोग से ही प्रसन्न किया हुआ है । जो ईश्वर सारे संसार को चला रहा है उसे भला हमारे चंद सिक्कों और महंगी धातुओं से क्या लेना -देना । अक्सर हम जो आरती गाते हैं उसमें एक पंक्ति आती है ‘तेरा तुझको अर्पण मेरा क्या लागे’। यही भाव भक्तों को चढ़ावा चढ़ाने के लिए प्रेरित करता है ।

आजकल  अयोध्या का राम मंदिर बहुत ज्यादा चर्चा में है । वहाँ पर भक्तों के चढ़ावे की रकम और कीमती धातुओं के उपहारों को चंद लोगों ने लूट लिया । शायद इन लुटेरों को भजन की पंक्ति याद आ गई होगी की ‘राम नाम की लूट सके तो लूट’ । मगर राम नाम तो लूटा नहीं लूट लिया राम के नाम का चढ़ावा । कितनी बुरी बात है ईश्वर के घर में चोरी करना । चोर तो चोर होता है चाहे वो किसी के घर में चोरी करे या भगवान के घर में । चोर की सोच ये होती होगी की पत्थर या धातु से बने भगवान को धन की क्या आवश्यकता है वो तो भाव के भूखे हैं । धन की आवश्यकता तो इन्सानों को होती है ।
गवान तो सारे सृष्टि के पालनहार हैं । इन चोरों ने शायद ईश्वर को चुनौती दी हो कि जगत की रक्षा करने वाला हमारा क्या बिगाड़ लेगा ।
ये ईश्वर की ही माया है कि कहीं धूप कहीं छाया । उसके दरबार में चाहे राजा हो या रंक सभी अपना सिर झुकाते हैं । ईश्वर के लिए सभी प्राणी समान हैं । वो परमपिता सभी को समान आशीर्वाद देता है वो तो प्राप्त करने वाले पर है कि वो उसे कितना ले पता है । इसीलिए भक्त गाते भी हैं राम नाम की लूट है लूट सके तो लूट । देखिये राम के नाम को  भी भक्त लूटते हैं । कितना एकात्म है भगवान के साथ भक्त का ।

भक्तगण ईश्वर के लिए भक्ति भाव से गाते हैं कि तेरा तुझको अर्पण क्या लगे मेरा । अब इस घोर कलयुग में दान दाताओं का दान चुराने वाले शायद यही गाते होंगे कि अब जो तेरा है वो मेरा है । तू दाता मैं ही तुझ से सब कुछ पाता । इसीलिए राम नाम को लूटने से अच्छा है कि मैं दान ही लूट लूं । ईश्वर भी अब सोचता है कि भाई मुझे क्या करना है इन चढ़ावों का । उल्टे सीधे तरीकों से कमाया हुआ अपना धन तुम ही ले जाओ । मुझे तुम्हारे पाप का भागीदार नहीं बनना । इसीलिए भगवान राम जिनके आदर्शों का आज तक उद्धारण दिया जाता है । माता के वनवास के आदेश को उन्होने बिना किसी प्रश्न के सिर माथे रख उसका पालन किया । ऐसे मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने अपने मंदिर में चोरों को भी अपना काम करने दिया ।
भगवान राम भी इन चोरों की चोरी के समय सोच रहे होंगे
“तेरा तुझको अर्पण मेरा क्या लागे”
राम के नाम पर इतनी योजनाएं बनी हैं । चोरों ने राम के नाम और दान की चोरी कर ही डाली । चोर भी चोरी के समय यही गा रहे होंगे “पायो जी पायो मैंने राम रतन धन पायो”।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)

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