अब्दुल हत्याकांड में पुलिस की लापरवाही पर डीआईजी सख्त
दो दिन तक दर्ज नहीं हुआ मुकदमा, एसपी सिटी को सौंपी गई जांच
सीओ कोतवाली, लोहियानगर थाना प्रभारी और संबंधित हल्का प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए
मेरठ। थाना लोहियानग क्षेत्र में हुए अब्दुल समद हत्याकांड में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने के बाद डीआईजी ने जांच बैठा दी है। डीआईजी ने मामले में थाना पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए जांच की जिम्मेदारी एसपी सिटी मेरठ को सौंपी है। इतना ही नहीं सीओ कोतवाली ,थाना प्रभारी लोहिया नगर , हल्का प्रभारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
इस मामले में प्राथमिक जांच में सामने आया है कि थाना पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से नहीं लिया। न समय पर मुकदमा दर्ज किया गया और न ही अब्दुल समद की तलाश के लिए तत्काल कार्रवाई की गई। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते सक्रिय होती, तो उनके बेटे की जान बचाई जा सकती थी। इस मामले से पुलिस की छवि भी धूमिल हुई है।
डीआईजी कलानिधि नैथानी ने पूरे प्रकरण की जांच एसपी सिटी को सौंपने के साथ ही सीओ कोतवाली, लोहियानगर थाना प्रभारी और संबंधित हल्का प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
15 जून को गायब हुआ था अब्दुल
17 वर्षीय अब्दुल समद 15 जून को लापता हो गया था। 16 जून को उसके परिजन गुमशुदगी की तहरीर लेकर लोहियानगर थाने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज नहीं किया और न ही उसकी तलाश के लिए सक्रिय अभियान चलाया। दो दिन की देरी के बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।
18 जून को अब्दुल का शव जाहिदपुर के नाले में मिला। प्रारंभिक जांच में उसकी हत्या की पुष्टि हुई। परिजनों का आरोप है कि यदि पुलिस समय रहते मुकदमा दर्ज कर तलाश शुरू करती, तो अब्दुल की जान बचाई जा सकती थी।पूरे मामले में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। डीआईजी ने माना कि घटना की संवेदनशीलता और तहरीर मिलने के बावजूद मुकदमा दर्ज करने में दो दिन की देरी हुई, जिससे पुलिस की छवि धूमिल हुई है। मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी गई है। साथ ही सीओ कोतवाली, लोहियानगर थाना प्रभारी और संबंधित हल्का प्रभारी से स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए गए हैं।


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