पर्यावरण चेतना के लिए वैश्विक प्रयास जरूरी- डॉ.मुकेश गौतम

मुंबई। पर्यावरण चेतना के प्रतिष्ठित कवि डॉ.मुकेश गौतम ने कहा कि इस दौर में विश्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रतिदिन गहराता पर्यावरण संकट है और इसके लिए वैश्विक स्तर पर बड़े सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है। यहां गोरेगांव(प.) में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में "चित्रनगरी संवाद मंच" द्वारा उनकी नवीनतम पुस्तक 'हरित-अमृत' पर आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यदि तुरंत ही पूरे विश्व में पर्यावरण संकट से निपटने के लिए बड़े और सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो धरती पर मनुष्य का जीना ही मुश्किल हो जाएगा।

डॉ.मुकेश गौतम ने कहा कि ऋतुओं और प्राणियों के व्यवहार में बदलाव, बाढ़, सूखा, भूकंप, सूखते तालाब-पोखर, झील, भूजल स्तर का घटना, नदियों का सूख जाना, प्राणियों की कई प्रजातियों का विलुप्त होने के कगार पर पहुंच जाना कोई सामान्य घटना नहीं है बल्कि ये मनुष्य के लिए कड़ी चेतावनी है कि यदि तुरंत प्रकृति को लेकर अपने कार्य और व्यवहार में बदलाव नहीं किया गया तो धरती से जीवन खत्म होने के कगार पर पहुंच जाएगा। उन्होंने जब जलता है जंगल, धराली क्यों बहा, जंगल का संगीत जैसी अपनी प्रसिद्ध कविताएं प्रस्तुत कर लोगो का ध्यान इस और खींचा। 

वरिष्ठ पत्रकार विवेक अग्रवाल ने पुस्तक 'हरित-अमृत' पर अपना समीक्षात्मक लेख पढ़ा और मुंबई विश्वविद्यालय के उर्दू के विभागाध्यक्ष प्रो. कमर सिद्दीकी ने डॉ.मुकेश गौतम के लेखकीय पक्ष और व्यक्तित्व पर अपने विचार प्रस्तुत किए। प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता नुसरत खत्री और अफजल खत्री ने पर्यावरण संकट की चुनौती पर वक्तव्य दिया। व्यंग्यकार, संचालक सुभाष काबरा के संचालन में डॉ.दमयंती दीप, डॉ.ममता झा, डॉ.मधुबाला शुक्ला, सत्यम आनंदजी, शैलेन्द्र श्रीवास्तव, नवीन चतुर्वेदी, ऋषि श्रीवास्तव, प्रदीप गुप्ता, गुलशन मदान ने अपने विचार प्रस्तुत किए।

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