राम मंदिर चंदा विवाद प्रकरण 

एसआईटी ने चंपत राय सहित कई पदाधिकारियों से की पूछताछ
 पुराने वीडियो फुटेज को लेकर उठे सवाल, अब तक सौ लोगों से पूछताछ 
अयोध्या । राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) की दूसरे दिन भी तफ्तीश जारी रही। सात घंटे से अधिक समय तक टीम मंदिर परिसर में जांच करती रही। अब तक ट्रस्ट के पदाधिकारियों, पुजारियों, बैंक अधिकारियों समेत सौ से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। संदिग्धों से भी सवाल-जवाब जारी हैं।

एसआईटी सोमवार को अयोध्या पहुंची थी और करीब साढ़े सात घंटे तक जांच-पड़ताल की थी। मंगलवार सुबह 11 बजे एसआईटी अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन मंदिर परिसर पहुंचे और सीधे ट्रस्ट कार्यालय गए। उनके साथ जिले के अधिकारी भी मौजूद रहे। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और गोपाल राव समेत अन्य पदाधिकारियों तथा उनसे जुड़े लोगों से जानकारी ली। इसके अलावा कर्मचारियों से भी लंबी पूछताछ की गई।
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मंदिर निर्माण से अब तक का लेखा-जोखा खंगाल रही एसआईटी
एसआईटी मंदिर निर्माण के बाद शुरू हुई दान प्रक्रिया की पूरी जानकारी जुटा रही है। दान किस प्रकार लिया जाता था, उसकी गिनती कैसे होती थी और उस समय वहां कौन-कौन लोग मौजूद रहते थे, इसकी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार 40 से 50 लोगों के नाम सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है। एसआईटी यह भी देख रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में कौन-कौन लोग तैनात थे और उनकी मौजूदगी में कथित रूप से रकम कैसे गायब हुई। इन सभी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। टीम ने पूरा लेखा-जोखा जुटा लिया है और सीसीटीवी फुटेज को अहम साक्ष्य माना जा रहा है।

फुटेज डिलीट हुए या नहीं, जांच जारी
मामले में ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारी महिपाल सिंह ने आरोप लगाया था कि आठ महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए थे। एसआईटी इस बिंदु पर गहन जांच कर रही है। मामले में सबसे अहम साक्ष्य सीसीटीवी फुटेज ही माने जा रहे हैं, जिनसे यह पता चल सकेगा कि कब, किसने और किस प्रकार कथित तौर पर रकम गायब की और मामला कैसे उजागर हुआ।

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