तृणमूल का कांग्रेस में होगा विलय! 

सोनिया गांधी से मिलीं ममता बनर्जी, अभिषेक से राहुल की हुई मुलाकात

28 साल बाद फिर कांग्रेस के द्वार पर ममता

 नयी दिल्ली। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक महा-संग्राम और सांसदों की बगावत के बीच दिल्ली में ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से और अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से मुलाकात की है। टीएमसी के कांग्रेस में विलय की चर्चा तेज हो गयी है। 

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस  की हार और पार्टी के दो भागों में बंटने के बाद अब तृणमूल के कांग्रेस में विलय की चर्चा तेज है। जी हां, ममता बनर्जी अपनी 28 साल पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस का भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस  में पूर्ण विलय  करने की सबसे बड़ी और अंतिम योजना पर विचार कर रही हैं।

दिल्ली में हुई 2 हाई प्रोफाईल बैठकें

खबर है कि दिल्ली में 10 जनपथ से लेकर कांग्रेस के शीर्ष हलकों में बैक-टू-बैक 2 हाई-प्रोफाइल बैठकें हुई हैं। कलकत्ता से लेकर दिल्ली तक जांच एजेंसियों के बढ़ते शिकंजे और 20 लोकसभा सांसदों की बगावत से पूरी तरह टूट चुकीं ममता बनर्जी कांग्रेस के शरण में हैं। सोनिया गांधी ने उन्हें सलाह दी कि वे अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय कर दें।

अपने और अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के राजनीतिक व कानूनी वजूद को बचाये रखने की आखिरी कोशिश के तहत ममता बनर्जी संभवत: इस पर सहमत हो गयीं हैं। अगर ऐसा हुआ, तो 28 साल के बाद ममता बनर्जी फिर वहीं पहुंच जायेंगी, जहां से उन्होंने नयी यात्रा शुरू की थी।

सोनिया गांधी के गले लगकर बयां किया था दर्द

सोमवार को नयी नल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में इंडिया  गठबंधन की बैठक के बाद राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदला है। ममता बनर्जी कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने उनके आवास 10 जनपथ पहुंचीं। करीब 45 मिनट की गोपनीय बैठक में ममता बनर्जी अपने 20 सांसदों के एनडीए खेमे में जाने और रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों के विद्रोह का जिक्र करते हुए भावुक हो गयीं।

दिल्ली में किंगमेकर बनने का ख्वाब देख रहीं ममता की पार्टी हुई खत्म

कभी दिल्ली की सत्ता में किंगमेकर बनने का ख्वाब देखने वाली ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी के सामने स्वीकार किया कि बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार के आने के बाद उनके लिए अपना संगठन बचाये रखना संभव नहीं है.

ममता-सोनिया और राहुल-अभिषेक की गुप्त बैठक में तैयार हो रही नयी स्क्रिप्ट

एक तरफ सोनिया गांधी ने ममता बनर्जी को ढाढ़स बंधाया, तो दूसरी तरफ कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के बीच दिल्ली में अज्ञात ठिकाने पर लंबी बैठक हुई। सूत्रों का दावा है कि विधायकों के जाली हस्ताक्षर मामले में सीआईडी  द्वारा कालीघाट आवास पर भेजे गये तीसरे समन और प्रवर्तन निदेशालय  के शिकंजे में घिरे अभिषेक बनर्जी ने राहुल गांधी से राजनीतिक व कानूनी सुरक्षा की मांग की है।

क्यों जरूरी हो गया विलय?

जानकारों का मानना है कि यदि टीएमसी का आधिकारिक तौर पर कांग्रेस में विलय हो जाता है, तो ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को एक क्षेत्रीय क्षत्रप की बजाय देश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के राष्ट्रीय चेहरे के रूप में केंद्रीय सुरक्षा और ढाल मिल जायेगा। इतना ही नहीं, बंगाल में कांग्रेस के पुराने कैडर को साथ मिलाकर वे जमीन पर शुभेंदु अधिकारी सरकार के खिलाफ मोर्चा खड़ा कर सकेंगे.

ममता के लिए आसान नहीं घर वापसी की राह

यदि यह विलय हो जाता है, तो भारतीय राजनीति के इतिहास का सबसे बड़ा यू-टर्न होगा. ममता बनर्जी ने तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व से बगावत करके 1 जनवरी 1998 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) की स्थापना की थी. उन्होंने तब नारा दिया था कि असली कांग्रेस वही हैं. 28 साल बाद इतिहास खुद को दोहरा रहा है. ममता बनर्जी उसी कांग्रेस के दरवाजे पर पहुंच गयीं हैं.

अधीर रंजन चौधरी और प्रदेश कांग्रेस का अंदरूनी विरोध

दिल्ली में आलाकमान के स्तर पर चल रही इस खिचड़ी से पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (WBPCC) के नेता बिल्कुल भी खुश नहीं हैं। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी के खेमे के नेताओं का मानना है कि जिसने बंगाल में कांग्रेस को खत्म करने के लिए 3 दशक तक हिंसक राजनीति की, उसे पार्टी में वापस शामिल करना आत्मघाती साबित होगा। यूसुफ पठान और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे टीएमसी के शीर्ष सांसदों की इस पूरे विलय योजना पर रहस्यमयी चुप्पी इस बात का इशारा कर रही है कि पार्टी के भीतर बिखराव अब अंतिम चरण में है।

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