बुलंदशहर बार अध्यक्ष के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट पर रोक

शैक्षणिक दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियों की जांच को स्वतंत्र समिति गठित, दो माह में देगी रिपोर्ट

बुलंदशहर। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने एक अधिवक्ता के नामांकन और एलएलबी की शैक्षणिक योग्यता से जुड़े दस्तावेजों में कथित गंभीर गड़बड़ियों और विसंगतियों के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच समिति का गठन कर दिया है। साथ ही अंतरिम व्यवस्था के तहत संबंधित अधिवक्ता के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। जांच पूरी होने तक वह देश की किसी भी अदालत, ट्रिब्यूनल अथवा अन्य न्यायिक मंच पर वकालत नहीं कर सकेंगे।

यह कार्रवाई डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन बुलंदशहर के वर्तमान अध्यक्ष सुमन कुमार सिंह राघव के संबंध में दायर प्रकरण में की गई है। मामला पवन कुमार (कैविएटर) और बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश से जुड़ा हुआ बताया गया है।

बीसीआई के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रारंभिक समीक्षा में वर्ष 1989-90 के तीन अलग-अलग शैक्षणिक अभिलेखों में गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं। पहला रिकॉर्ड 2 सितंबर 1989 का बताया गया है, जिसमें चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (तत्कालीन मेरठ विश्वविद्यालय) के अभिलेखों के अनुसार संबंधित छात्र को श्रम कानून (लेबर लॉ) और आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) विषय में फेल अथवा अनुपस्थित दर्शाया गया था।

दूसरा रिकॉर्ड 18 अक्टूबर 1989 का है, जिसमें उन्हें लैंड लॉ और सीआरपीसी विषयों में पूरक परीक्षा (सप्लीमेंट्री) के लिए पात्र बताया गया है। इस अंकपत्र में दोनों विषयों में मात्र 25-25 अंक अंकित हैं।

वहीं तीसरा दस्तावेज 29 जनवरी 1990 का है, जिसमें उन्हीं विषयों में प्राप्तांक अचानक बढ़कर क्रमशः 63 और 55 दर्शाए गए हैं। बीसीआई के अनुसार इस दस्तावेज में विषय कोड और विषय विवरण से संबंधित प्रविष्टियों में हाथ से की गई ओवरराइटिंग तथा अन्य विसंगतियां भी प्रथम दृष्टया दिखाई दी हैं।

मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति, रजिस्ट्रार और परीक्षा नियंत्रक को जांच समिति को पूर्ण सहयोग देने के निर्देश जारी किए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन से वर्ष 1989-90 के मूल परीक्षा आवेदन पत्र, उपस्थिति पत्रक, टैबुलेशन रजिस्टर, परिणाम रजिस्टर तथा अन्य मूल अभिलेख समिति के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है।

बीसीआई द्वारा गठित स्वतंत्र जांच समिति को दो माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। परिषद ने स्पष्ट किया है कि मूल शैक्षणिक दस्तावेजों की सत्यता की जांच पूरी होने तक किसी भी संदिग्ध दस्तावेज के आधार पर संबंधित अधिवक्ता को निर्बाध रूप से वकालत करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

इस आदेश के बाद कानूनी समुदाय में मामले को लेकर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है और अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।

कैप्शन: एलएलबी की मार्कशीट और शैक्षणिक अभिलेखों में कथित विसंगतियों के मामले में बीसीआई ने स्वतंत्र जांच समिति गठित कर संबंधित अधिवक्ता के प्रैक्टिस सर्टिफिकेट पर अंतरिम रोक लगा दी है।

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