ऑटिज्म-फ्री मुजफ्फरनगर के तहत निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न
मुजफ्फरनगर रीजन के लगभग 200 अभिभावक बच्चों के साथ शामिल हुए
मुजफ्फरनगर। मुजफ्फरनगर नगर पालिका परिषद की चेयरपर्सन श्रीमती मीनाक्षी स्वरूप के नेतृत्व में चलाए जा रहे “ऑटिज्म-फ्री मुजफ्फरनगर अभियान” के अंतर्गत रविवार को रेड क्रॉस भवन, सीएमओ कार्यालय परिसर, लद्दावाला, मुजफ्फरनगर में ऑटिज्म, एडीएचडी एवं अन्य न्यूरो-डेवलपमेंटल चुनौतियों से प्रभावित बच्चों के अभिभावकों के लिए एक निःशुल्क प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में मुजफ्फरनगर, मेरठ, रुड़की तथा आसपास के क्षेत्रों से लगभग 200 अभिभावक अपने बच्चों के साथ शामिल हुए।
कार्यक्रम में कैन (क्योर ऑटिज्म नाउ) प्रोटोकॉल के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की गई। कैन प्रोटोकॉल के प्रवर्तक डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी (बीआरसी) के अनुसार पिछले दो दशकों में ऑटिज्म और एडीएचडी जैसी न्यूरो-डेवलपमेंटल समस्याओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार भारत में लगभग हर 10 में से एक बच्चा एडीएचडी तथा हर 100 में से एक बच्चा ऑटिज्म से प्रभावित है। कैन टीम के अनुसार डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी एवं डॉ. नमिता गुप्ता के मार्गदर्शन में पिछले लगभग दस महीनों के दौरान देश-विदेश के करीब 6000 बच्चों तक इस पहल का लाभ पहुंचा है, जिनमें अनेक बच्चे अब मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ चुके हैं। डॉ. बीआरसी की बेस्टसेलिंग किताब “क्योर ऑटिज्म नाउ” में कैन प्रोटोकॉल का पूरा विवरण मौजूद है।
मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि पिछले माह उन्होंने फरीदाबाद स्थित कैन केंद्र का दौरा किया था, जहां उन्होंने स्वयं ऐसे बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन देखा जो ऑटिज्म, एडीएचडी तथा सेरेब्रल पाल्सी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे थे। इनमें मुजफ्फरनगर का एक बच्चा भी शामिल था। इसी अनुभव से प्रेरित होकर उन्होंने अपने गृह जनपद में “ऑटिज्म-फ्री मुजफ्फरनगर अभियान” प्रारंभ करने का निर्णय लिया।
शिविर में डॉ. नमिता गुप्ता ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए बच्चों की जीवनशैली, खान-पान और नीम थेरेपी के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उचित मार्गदर्शन, नियमित निगरानी और अनुशासित दिनचर्या के माध्यम से बच्चों में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा सकता है। कार्यक्रम के दौरान अभिभावकों का पंजीकरण किया गया तथा उन्हें कैन ट्रैकर डायरी और नीम पत्ती पाउडर उपलब्ध कराया गया।
आयोजकों ने बताया कि पंजीकृत अभिभावक प्रत्येक रविवार को इसी केंद्र पर पहुंचेंगे, जहां बच्चों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी तथा उसे कैन ट्रैकर डायरी में दर्ज किया जाएगा। फरीदाबाद स्थित कैन सपोर्ट टीम आगामी अवधि में भी परिवारों को निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान करेगी।
कार्यक्रम में उपस्थित अनेक अभिभावकों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उन्हें अपने बच्चों के लिए नई उम्मीद और व्यवस्थित मार्गदर्शन प्राप्त हुआ है, जबकि सामान्य चिकित्सा पद्धति से बच्चों को लाभ नहीं मिल था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नियमित फॉलो-अप और सहयोग से बच्चों के विकास में सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकते हैं।
अपने संबोधन में मीनाक्षी स्वरूप ने अभियान को मिले उत्साहजनक समर्थन पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि मुजफ्फरनगर के प्रत्येक जरूरतमंद परिवार तक इस पहल को पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों, विशेषज्ञों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए अभियान को निरंतर आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।


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