राजकीय निर्माण निगम का जेई  रिश्वत लेते गिरफ्तार

ठेकेदार से 1 लाख रुपए की घूस मांगी थी, उसका ड्राइवर भी धरा गया

मेरठ। थाना मेडिकल क्षेत्र में  एंटी करप्शन की टीम ने उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम के जूनियर इंजीनियर योगेंदर कुमार को 1 लाख रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया है। जेई ने बिल पास कराने की एवज में रिश्वत मांगी थी। दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जिसमें यूनिट इंचार्ज प्रत्यूष सिंह का ड्राइवर नीरज भी शामिल है।

सत्येंद्र सिंह तोमर उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में ठेकेदारी करते हैं। लंबे समय से उनका पेमेंट विभाग में अटका हुआ है। उन्होंने विभाग में काफी प्रयास किया लेकिन भुगतान नहीं हो पाया।संपर्क किया तो पता चला की विभाग के JE के द्वारा यह पेमेंट रुकवाया जा रहा है। सत्येंद्र ने JE योगेंद्र कुमार से संपर्क किया तो योगेंद्र ने बिल पास कराने की एवज में एक लाख रुपए की मांग कर दी।

पीड़ित ठेकेदार ने एंटी करप्शन में की शिकायत

पिछले काफी समय से सत्येंद्र सिंह तोमर पर रिश्वत देने का दबाव बनाया जा रहा था। सत्येंद्र ने परेशान होकर एंटी करप्शन में शिकायत कर दी।लिखित शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन ने ट्रैप की प्रक्रिया शुरू कर दी। एंटी करप्शन टीम ने सत्येंद्र को केमिकल लगे एक लाख रूपए देकर विभाग में भेज दिया।

ड्राइवर की मदद से ले रहा था रिश्वत

मंगलवार सुबह सत्येंद्र ने जेई योगेंद्र कुमार से संपर्क किया तो उन्हें विभाग में बुला लिया गया। सत्येंद्र एंटी करप्शन टीम द्वारा दिए गए 1 लाख रूपए लेकर पहुंच गया। कार्यालय परिसर में पहुंचकर फोन किया तो JE ने इस यूनिट के इंचार्ज प्रत्यूष सिंह के ड्राइवर नीरज को रकम लेने के लिए भेजा। जैसे ही नीरज ने रकम पकड़ी एंटी करप्शन टीम ने दबोच लिया।नीरज को लेकर एंटी करप्शन टीम विभाग में मौजूद योगेंद्र को दबोचने पहुंची तो वह भागने का प्रयास करने लगा लेकिन कुछ दूरी पर ही दबोच लिया गया।

कौन हैं सतेंदर सिंह तोमर

सत्येंद्र सिंह तोमर उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम में ठेकेदार हैं। उनकी चौधरी एसोसिएट नाम की फर्म है। वर्ष 2020 में सत्येंद्र की फर्म को बागपत स्थित राजा मिहिर भोज डिग्री कॉलेज बेगमाबाद पाबला का ठेका मिला। उस पूरे ठेके की कास्ट 8.50 करोड़ रुपये थी। वर्ष 2023 में उनके हिस्से का काम पूरा हो गया। काम पूरा होने के बाद सत्येंद्र ने भुगतान की प्रक्रिया शुरु कर दी।

आखिरी किश्त में भुगतान का दिया आश्वासन

सत्येंद्र का आरोप है कि बिल देने के बावजूद उनको पेयमेंट नहीं किया गया। कहा बजट खत्म हो गया है, जैसे ही आएगा भुगतान करा देंगे। सत्येंद्र तोमर का कहना है कि जिस बजट का जिक्र विभाग करता था वह भी आ गया लेकिन विभाग ने बिल तैयार नहीं किए। बिल निकालकर अलग रख दिए। सात लाख के बिल थे, जिसकी जीएसटी वह जमा कर चुके थे। इससे जीएसटी भी ब्लॉक हो गई।

10 माह से लटकाया हुआ था भुगतान

सत्येंद्र ने बताया कि करीब 10 माह से रुपया विभाग के पास आया हुआ था लेकिन वह भुगतान नहीं कर रहे थे। मार्च में दोबारा बिल दिए लेकिन जेई योगेंद्र कुमार ने एकाउंटेंट की मदद से इस बार भी बिल निकालकर अलग रख दिए गए और कहा कि मई में भुगतान करेंगे। बामुश्किल पेंटर का लगभग 6 लाख का भुगतान विभाग ने किया।

लगभग 25 लाख रुपये का होना था भुगतान

सत्येंद्र ने बताया कि विभाग से इनको 25 लाख रुपये का भुगतान होना था। इसमें मूल रकम, सिक्योरिटी, बिल और जीएसटी शामिल है। करीब आठ लाख रुपये के ऐसे बिल लंबित हैं जो इनके द्वारा तैयार ही नहीं किए गए।

1.70 लाख रुपये मांगे रिश्वत के तौर पर

ठेकेदार सत्येंद्र ने बताया कि उनसे बिल पास करने की एवज में 1.70 लाख रुपये मांगे गए थे। उन्होंने पैसा ना होने का हवाला दिया तो मांग एक लाख रुपये की हो गई। लंबा पेयमेंट फंसा था। इसलिए परेशान होकर सत्येंद्र ने करीब 10 दिन पहले एंटी करप्शन डिपार्टमेंट में शिकायत की, जिसके बाद मंगलवार को ट्रैप की कार्रवाई की गई।

शिकायत के बाद भी नहीं हुई कोई मदद

सत्येंद्र ने बताया कि उन्होंने भुगतान ना होने की शिकायत उस वक्त यहां के अफसर रहे मनेंदर सिंह से शिकायत की लेकिन उन्होंने भुगतान का आश्वासन दिया। उनके बाद दूसरे प्रोजेक्ट मैनेजर ने भी आश्वासन दिया लेकिन फिर भी काम नहीं हुआ। वर्तमान में प्रोजेक्ट मैनेजर के रूप में प्रत्यूष सिंह यहां तैनात हैं। उनसे शिकायत की तो उन्होंने एकाउंटेंट के सिर ठीकरा फोड़ दिया।

जान बूझकर ठेकेदार का होता है शोषण

सत्येंद्र ने बताया कि उन्होंने अफसरों से कहा था कि पहले वह उनके द्वारा किए गए काम को अच्छी तरह जांच करा लें। उसके बाद भुगतान करें। क्योंकि उन्होंने मानकों के अनुरूप काम किया था और कोई उनके काम में कमी भी नहीं निकाल सकता था। लेकिन विभाग बेवजह की खामियां खड़ी करता था ताकि उनकी मांग को पूरा किया जाए।

थाने में बिलखती रही ड्राइवर नीरज की पत्नी

पति को पुलिस ने पकड़ लिया है, इसकी जानकारी मिलते ही ड्राइवर नीरज की पत्नी अपने ससुर को लेकर मेडिकल थाने आ गई। उसने पुलिस से मदद मांगने की कोशिश की लेकिन मामला एंटी करप्शन डिपार्टमेंट का था, इसलिए सभी ने हाथ खड़े कर दिए। वह विभाग भी गई लेकिन वहां से भी कोई मदद नहीं मिली।

राजीवपुरम कालोनी में बना है दफ्तर

उत्तर प्रदेश राज्यकीय निर्माण निगम का यह दफ्तर मेडिकल थाना क्षेत्र के गढ़ रोड पर मेडिकल कॉलेज के सामने राजीवपुरम कालोनी में बना है। एक मकान के भीतर यह ऑफिस बना है। एंटी करप्शन की कार्रवाई के बाद चुपके से यहां लगा बोर्ड हटा दिया गया ताकि मीडिया विभाग तक ना पहुंच सके।


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