बजट के अभाव में अटका संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का मानदेय

वेतन ने मिलने से कार्य हो रहा प्रभावित ,उधार मांगकर परिवार चला रहे एनएचएम से जुडे़  कर्मी 

मेरठ। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत संचालित स्वास्थ्य योजनाओं पर तो बजट संकट का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। साथ ही जिले में एनएचएम के अंतर्गत कार्यरत लगभग 1119  संविदा स्वास्थ्य कर्मियों और 181आउटसोर्सिंग पर तैनात कर्मचारी है कुलमिलाकर 1300 कर्मचारी है । इसमें एचएचएम से जुडे चिकित्सक भी शामिल है। सभी को मार्च और अप्रैल माह से मानदेय नहीं मिला है। जिसके चलते कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 जिले की बात करें तो यहां पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत चिकित्सक, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स, लैब तकनीशियन, डाटा एंट्री ऑपरेटर, वार्ड सहायकों सहित कई संविदा कर्मी कार्यरत हैं। इसके अलावा विभाग में आउटसोर्सिंग पर काफी कर्मचारी तैनात हैं। जिसमें 135 डाक्टर भी शामिल है।  इन कर्मचारियों का कहना है कि हर वर्ष मार्च तक बजट स्वीकृत जाता था, लेकिन इस बार देरी के कारण मार्च और अप्रैल महीने का अभीतक मानदेय नहीं मिला है। जिसके चलते मुश्किल और ज्यादा बढ़ गई हैं। घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। कई कर्मचारियों को बच्चों की फीस, किराया और दैनिक जरूरतों के लिए दो महीने से नहीं मिला है 

घर चलाना हुआ मुश्किल कर्मियों में आक्रोश

उधार लेना पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ द्वारा लगातार अधिकारियों को पत्र के माध्यम से मानदेय दिलाए जाने सहित अन्य मांगों को लेकर अवगत भी कराया जा रहा है। लेकिन इसके बाद भी अभीतक कर्मचारियों को मानदेय नहीं मिला है। होली पर भी जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को मानदेय नहीं मिला था। जिसके चलते इन कर्मचारियों का होली का त्योहार फीका हो गया था।

प्रति वर्ष आता है करोड़ों का बजट 

 शासन ने नेशनल हेल्थ मिशन की बात करें तो ंप्रति वर्ष मेरठ जिले को 166.58 करोड़ का बजट आता है। अधिकारियों की मांने तो पिछले वित्त वर्ष में 78.11 24 जनवरी को आया था। जो सीएचसी व कर्मचारियों पर खर्च हो गया। बाद में जो बजट आया था वह वेंडर पर खर्च हो गया। यानी गत वित्तीय वर्ष के मार्च माह व अप्रैल माह का वेतन अभी तक एचएचएम से जुड़े कर्मचारियों को नहीं मिल पाया है। मंहगाई के इस दौर में परिवार चलाना काफी मुश्किल है। ऐसे में दो माह से वेतन न आए तो आप अपने आप अंदाज लगा सकते है। मिशन से जुड़े कर्मचारी किस प्रकार अपने परिवार को पाल रहे होंगे। 

  गर्भवती महिलाओं को हो रही परेशानी 

 एनएचएम से जुडे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं के लिए हर माह एक, नौ,16 और 24 तारीख को लगने वाले सत्रों में ई वाऊचर जनरेट होते है। बजट न आने से गर्भवती महिलाओं के ई वाऊचर जनरेट नहीं हो पा रहे है। गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए प्राईवेट अस्पतालों के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। 

बोले अधिकारी 

शासन स्तर से बजट कारण भुगतान अटका है। शासन स्तर से धनराशि जारी होते ही कर्मचारियों को मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।

डॉ. अशोक कटारिया, सीएमओ।



No comments:

Post a Comment

Popular Posts