गर्मी: बचाव ही उपचार
इलमा अज़ीम 

 नौतपा शुरू हो गया। ऐसे में गर्मी का प्रचंड रूप सामने आ रहा है। देश के अधिकांश राज्य विशेषकर देश की राजधानी दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर और मध्य भारत इस समय झुलसाने वाली गर्म हवाओं की चपेट में है। त्वचा को झुलसाने और शरीर का पानी सुखाने वाली गर्म हवाएं चल रही हैं।

 मौसम विभाग भीषण गर्मी और लू का अलर्ट जारी कर चुका है। इस समय सूरज आग उगल रहा है और तापमान 48 डिग्री तक पहुँच गया है। कई क्षेत्रों में 50 डिग्री का दावा भी किया जा रहा है। गर्मी अकेले नहीं आती बल्कि अपने साथ कई तरह की परेशानियां भी लेकर आती है। मानव और पशुधन के साथ खेत खलिहान भी बढ़ते तापमान और लू की चपेट में आ रहे है। देश में कई स्थानों पर खेतों में खड़ी फसलों के पत्ते और बेल झुलस रहे हैं। उनकी वृद्धि रुक गई हैं। इस दौरान हमारे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है। 

बाहरी तापमान और गर्म हवा की वजह से शरीर ठंडा नहीं हो पाता और शरीर का तापमान 106 डिग्री फेरनहाइट या इससे भी ज्यादा हो जाता है। लू लगना, आतप ज्वर, ऊष्मा मूर्छा (हीट स्ट्रोक या सन स्ट्रोक) शरीर की वह रुग्ण अवस्था है। लू लगने पर सिर में भारीपन महसूस होता है। खून का बहाव बॉडी में बहुत तेजी से होता है। सांसे काफी तेज चलती हैं। ऐसा लगता है जैसे शरीर टूट रहा है। 

आयुर्वेद चिकित्सक भीषण गर्मी के दौरान दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पीने, धूप में निकलते समय छाता, टोपी या गमछे का उपयोग करने, खाली पेट घर से बाहर नहीं निकलने, ज्यादा मसालेदार और तला हुआ भोजन खाने से बचने, बच्चों और बुजुर्गों को तेज धूप से दूर रखने, पानी या ओआरएस का सेवन करने की सलाह दी है।

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