प्रदेश में गन्ने की ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों के नियंत्रक हेतु एडवाइजरी जारी
गन्ना फसल में ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों (काला चिकटा, थ्रिप्स एवं सैनिक कीट) का प्रकोप बढ़ने से फसल को नुकसान का खतरा, किसानों को समय रहते प्रभावी नियंत्रण अपनाने की सलाह
काला चिकटा व थ्रिप्स पत्तियों का रस चूसकर उन्हें पीला/सफेद कर देते हैं, जिससे गन्ना फसल की वृद्धि रुक जाती है। सैनिक कीट समूह में पत्तियों को खाकर गन्ना फसल को तेजी से नुकसान पहुंचाता है
गन्ना किसान कीटों के नियंत्रण हेतु खेतों की नियमित सिंचाई, गुड़ाई एवं संतुलित उर्वरक का प्रयोग अवश्य करें
लखनऊ। प्रदेश के . मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में मा. गन्ना मंत्री, श्री लक्ष्मी नारायण चौधरी व मा. राज्यमंत्री, श्री संजय गंगवार के मार्गदर्शन में गन्ना कृषकों के व्यापक हितों के दृष्टिगत प्रदेश की अपर मुख्य सचिव, चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास, श्रीमती वीना कुमारी के निर्देश के अनुपालन में आयुक्त, गन्ना एवं चीनी, उ.प्र. ने बताया कि उ.प्र. गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर द्वारा गन्ना फसल में ग्रीष्मकालीन चूसक कीटों के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए गन्ना किसानों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कीटों की पहचान एवं नियंत्रण आवश्यक है। काला चिकटा (ब्लैक बग) कीट काले रंग का होता है। अप्रैल से जून के बीच गर्म एवं शुष्क मौसम में इसका प्रकोप ज्यादा होता है। प्रभावित पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं तथा उन पर कत्थई रंग के धब्बे दिखाई देते हैं। यह पत्तियों एवं गन्ने के गोप के मध्य रस चूसता है, जिससे गन्ने की बढ़वार रुक जाती है। थ्रिप्स बहुत छोटे (2-3 मिमी) आकार के कीट, मादा गहरे भूरे एवं नर हल्के रंग के होते हैं। गर्म एवं शुष्क मौसम में तेजी से बढ़ते हैं। पत्तियों की ऊपरी सतह के अंदर अंडे देते हैं तथा रस चूसने से पत्तियाँ मुड़कर नुकीली हो जाती हैं। प्रभावित पत्तियाँ ऊपर से नीचे की ओर सफेद/पीली पड़ जाती हैं और चाँदी जैसी चमकदार दिखती हैं। सैनिक कीट (कुतरकर खाने वाला कीट) की सूड़ी अवस्था गन्ने की पत्तियों को खाती है। मादा पत्तियों के बीच अंडे देती है, अंडों से छोटी सूड़ियाँ निकलकर शाम के समय पत्तियाँ खाती हैं। दिन में सूड़ियाँ जमीन के अंदर छिपी रहती हैं। गन्ने की फसल में इसका प्रकोप काफी अधिक होता है।
कीटों के नियंत्रण हेतु आवश्यक है कि गन्ना किसान खेतों की नियमित अन्तराल पर सिंचाई करते रहें। खेत को खरपतवार या गन्नें की सूखी पत्तियों से मुक्त रखें। सन्तुलित उर्वरकों का प्रयोग करें तथा सुबह या शाम के समय निम्न में से किसी एक कीटनाशक का प्रति हेक्टेयर की दर से प्रोफेनोफॉस 40ः $ साइपरमेन्थ्रिन 4ः ई.सी. (750 मिली. प्रति हेक्टेयर) अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8ः एस.एल. (200 मि.ली. प्रति हेक्टेयर) 625 लीटर पानी में घोल बनाकर कीट से प्रभावित खेतों में छिड़काव करें।
गन्ना किसानों से अपील है कि वे समय-समय पर कीटों की पहचान कर गन्ना फसल का निरीक्षण नियमित करें, कीटों की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान करें और उचित प्रबंधन अपनाकर न केवल गन्ना फसल को कीटों से सुरक्षित रखें, जिससे गन्ना उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार हो सके।


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