स्मार्ट मीटर  पर रोक लगने शहर के एक लाख उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत

बोले सरकार को पहले ही कदम उठना चाहिए था हंगामे की नौबत ही नहीं आती 

 मेरठ। जनता के विरोध के बीच प्रदेश सरकार ने बीती रात प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था समाप्त हो गई है। स्मार्ट मीटर अब प्रीपेड नहीं बल्कि पोस्टपेड की तरह ही काम करेंगे। इस आदेश से शहर में करीब एक लाख एवं पश्चिमांचल के 14 जिलों में करीब 13 लाख उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी

 मेरठ की बात करें तो  इससे एक लाख उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। उपभोक्ताओं की शिकायत थी कि मीटर तेज चल रहे थे और बिल अधिक आ रहे थे। अब मीटरों को बिना अनुमति के बदल दिया जाएगा।हालांकि 80 लाख उपभोक्ताओं के यहां इन मीटरों को लगाया जाना था। मेरठ में चार लाख उपभोक्ताओं में से करीब एक लाख उपभोक्ताओं के यहां स्मार्ट मीटर लगाकर उन्हें प्रीपेड किया जा चुका था। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के आदेश के बाद अब उपभोक्ताओं को मीटर को रिचार्ज नहीं कराना होगा, बल्कि उन्हें पहले की तरह हर महीने बिजली बिल आएगा। बिना उपभोक्ताओं की अनुमति के प्रीपेड किए गए मीटर पोस्टपेड में बदले जाएंगे। इसी के साथ नए कनेक्शन में भी प्रीपेड की अनिवार्यता समाप्त होगी।

उपभोक्ताओं की चिंताएँ

इससे लाखों उपभोक्ताओं को राहत तो मिलेगी, लेकिन उपभोक्ताओं के कई सवाल अभी भी है। उपभोक्ताओं का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिल कई गुना ज्यादा आ रहे थे। इन मीटरों के तेज चलने की शिकायतें हैं। प्रीपेड मीटरों को भले ही पोस्टपेड में बदल देंगे, लेकिन तेज चल रहे मीटरों से बिल अधिक आएगा। उपभोक्ताओं का कहना है कि इन मीटरों को बदलकर पुराने मीटर ही लगाए जाए।

 उपभोक्ताओं की हुई जीत

अवधेश कुमार वर्मा, अध्यक्ष राज्य उपभोक्ता परिषद एवं राज्य सलाहकार समिति सदस्य का कहना है कि आखिरकार उपभोक्ताओं की जीत हुई। प्रीपेड मीटर व्यवस्था समाप्त हुई और पोस्टपेड मीटर व्यवस्था बहाल होगी। आगे भी उपभोक्ताओं की कोई समस्या होगी तो उसे लड़ेंगे और उपभोक्ताओं का किसी भी तरह अहित नहीं होने देंगे। 

स्मार्ट मीटर पर रोक

रजनीकांत मिश्रा, मुख्य अभियंता का कहना है कि फिलहाल स्मार्ट मीट लगाने पर रोक लगाई हुई थी। प्रीपेड स्मार्ट मीटर व्यवस्था समाप्त किये जाने एवं प्रीपेड मीटरों को पोस्टपेड में बदलने संबंधित आदेश अभी नहीं मिला है। 

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