प्रारंभिक पहचान बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती- डा. विजय
जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म विषय पर शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन
मेरठ। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग द्वारा जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म विषय पर विश्व थ्थायरॉइ दिवस पर एक शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य नवजातों में जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग एवं उपचार के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था। इस स्थिति में बच्चा जन्म से पर्याप्त थायरॉइड हार्मोन नहीं बना पाता, जिससे मस्तिष्क एवं शारीरिक विकास प्रभावित हो सकता है यदि समय पर उपचार न मिले।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. विजय जायसवाल ने अपने व्याख्यान में जन्मजात हाइपोथायरॉइडिज़्म के चिकित्सीय महत्व, नवजात स्क्रीनिंग की आवश्यकता तथा बहुविषयक दृष्टिकोण की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक पहचान बच्चों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।असिस्टेंट प्रोफेसर एवं पीडियाट्रिक एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. तूबा कमर ने नवजातों में थायरॉइड विकारों के प्रारंभिक संकेतों, TSH एवं T4 आधारित जांच, उपचार की रणनीतियों तथा नियमित फॉलो-अप के महत्व पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने नवजात स्क्रीनिंग को बाल स्वास्थ्य संरक्षण का महत्वपूर्ण स्तंभ बताया।
कार्यक्रम के अंत में बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुपमा वर्मा ने कहा:“हर नवजात को समय पर जांच और उचित उपचार उपलब्ध कराना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता, प्रारंभिक स्क्रीनिंग और बहुविषयक सहयोग से हम बच्चों को स्वस्थ और बेहतर भविष्य दे सकते हैं।”इस कार्यक्रम में बाल रोग तथा प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग के फैकल्टी सदस्यों एवं रेजिडेंट्स ने भाग लिया।


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