बिहार- विक्रमशिला सेतु गिरा, भागलपुर का सीमांचल से संपर्क टूटा
शाम को दरार दिखी, रात को 34 मीटर स्लैब गंगा में समाया; गाड़ियां मुंगेर डायवर्ट
भागलपुर।बिहार के भागलपुर में विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा रात करीब 1:10 बजे गंगा में गिर गया। इससे जिले का सीमांचल से संपर्क टूट गया है।पुल के पिलर संख्या 4-5 के बीच एक्सपेंशन जॉइंट में शाम से ही दरार आनी शुरू हो गई थी। इसके बाद पुल से वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। राहत की बात रही कि हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है।सूचना मिलते ही SSP प्रमोद कुमार यादव, सदर SDM विकास कुमार, सिटी DSP अजय कुमार चौधरी और ट्रैफिक DSP संजय कुमार मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने तत्काल ट्रैफिक को डायवर्ट कराया और पुल पर मौजूद लोगों को सुरक्षित हटाया।
बताया जा रहा है कि देर शाम पहले 10 इंच का जॉइंट सस्पेंशन धंसा। इसके बाद देर रात एक स्लैब गंगा में समा गया। उस समय पुल पर वाहनों की लंबी कतार लगी थी। हालांकि पुलिस की सतर्कता से बड़ा हादसा टल गया। पुल निगम के अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
सीमांचल समेत 16 जिलों को भागलपुर से जोड़ता है ये पुल
विक्रमशिला सेतु पर प्रतिदिन लाखों लोगों का आवागमन होता है। करीब 50 हजार से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस पुल से गुजरते हैं। सीमांचल समेत 16 जिलों को यह सेतु भागलपुर से जोड़ता है। इसका निर्माण तत्कालीन मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के कार्यकाल में कराया गया था।पुल में लगातार जॉइंट और एक्सपेंशन गैप की समस्या को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। आखिरी बार वर्ष 2020 में पुल की मरम्मत कराई गई थी।कुछ दिन पहले ही वॉल वायरिंग क्षतिग्रस्त होने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि प्रशासन ने उस समय इसे खारिज करते हुए कहा था कि पुल पर किसी प्रकार का कोई खतरा नहीं है।
रोजाना करीब एक लाख लोग इससे आना-जाना करते हैं।यह पुल राष्ट्रीय राजमार्ग 131A (NH-131A) का हिस्सा है। इसके चालू होने से भागलपुर से पूर्णिया, मधेपुरा और सहरसा जैसे जिलों की दूरी काफी कम हो गई है।इस सेतु के माध्यम से पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम और बंगाल) के साथ व्यापार और माल ढुलाई में आसानी होती है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है।इसका नाम प्राचीन विक्रमशिला महाविहार के नाम पर रखा गया है, जिसकी स्थापना पाल वंश के राजा धर्मपाल ने की थी। यह विश्वविद्यालय कभी नालंदा की तरह ही शिक्षा का बड़ा केंद्र था।
बोले अधिकारी
डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बतायारविवार की रात 12.35 बजे से स्लैब धंसना शुरू हो गया। उससे पहले ही गाड़ियों को वहां से हटा दिया गया था। इस सतर्कता के कारण कोई दुर्घटना नहीं हुई। पुल की मरम्मत के लिए जल्द ही हाई लेवल कमेटी यहां आएगी। इससे पहले आई कमेटी ने पुल की जांच की थी। उसे पुल की स्थिति के बारे में जिला प्रशासन ने पूरी जानकारी दी थी।
ट्रैफिक डीएसपी संजय कुमार ने कहाजैसे ही स्ट्रीट लाइट पोल संख्या 133 के पास एक्सपेंशन जॉइंट के गैप की बढ़ने की सूचना मिली, दोनों ओर से गाड़ियों के आवागमन पर रोक लगा दी गई थी।
4.7 किमी लंबे पुल को 2001 में शुरू किया गया था।
4.7 किमी लंबे पुल को 2001 में शुरू किया गया था।
पुल के दोनों ओर बैरिकेडिंग की गई


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