नारी मन के गहरे भावों को उकेरती कहानियां


पुस्तक : दिल के दरीचे से
लेखिका : डॉ. रेखा मित्तल
प्रकाशक : बिम्ब-प्रतिबिंब प्रकाशन, फगवाड़ा, पंजाब
पृष्ठ : 105 मूल्य : रु. 250.


डॉ. रेखा मित्तल का ‘दिल के दरीचे से’ अत्यंत संवेदनात्मक और भावनात्मक कहानी संग्रह है, जिसमें मानवीय संवेदनाओं, रिश्तों की पेचीदगियों और नारी मन के गहरे में दबे भावों को खूबसूरती से उकेरा गया है। संग्रह की सभी तीस कहानियां पारिवारिक संस्कारों, सामाजिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं के इर्द-गिर्द घूमती हैं, जिनमें नारी मन की सूक्ष्मतम भावतरंगों और उनके संघर्षों का सजीव चित्रण किया गया है। कहीं न कहीं ये कहानियां आम जनजीवन में झांकते हुए समाज में व्याप्त भटकन, आपसी रिश्तों की खटास और उनमें पनपती दरार की दास्तान को बयान करती हैं।

‘दिल के दरीचे से’ शीर्षक स्वयं में अर्थगर्भ है, जो इंगित करता है कि यह संग्रह ह्रदय के कोमल क्षणों, अनुभूत संवेदनाओं और आत्ममंथन के उन विचारों का दर्पण है, जो वर्षों तक अंतरात्मा में संचित होते रहते हैं। संग्रह में वर्णित नारी चरित्र केवल कोमलता और वात्सल्य के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ये नारी चरित्र संघर्ष, धैर्य और आत्मबल की विराट प्रतिमाएं भी हैं। घर-बाहर के चक्रव्यूह में फंसी नारी, मातृत्व की पावनता, पारिवारिक संबंधों के नाजुक सूत्र और सामाजिक मूल्यों की प्रासंगिकता को बड़ी निपुणता से चित्रित किया गया है।
कहानियों में कहीं करुणा का रिक्त स्वर है तो कहीं ममता का स्पर्श, कहीं त्याग की महाकाव्यात्मक गाथा है तो कहीं वृद्धावस्था का अकेलापन, कहीं कॉलेज के दिनों के पहले प्रेम की महक है तो कहीं पारिवारिक और सामाजिक दबावों से किए गए समझौतों के फलस्वरूप नारी मन की मूक व्यथा का मर्मस्पर्शी चित्रण है।
प्रेम एक अनुभूति है और यह हर किसी को प्राप्त हो, यह जरूरी नहीं, लेकिन पहला प्रेम खास होता है। ऐसे ही प्रेम की दास्तान है ‘बसंती फूल’। स्त्री की व्यथा का मार्मिक चित्रण ‘चक्रव्यूह’ कहानी में किया गया है। घर और बाहर के काम के चक्रव्यूह में एक स्त्री की ज़िंदगी इस तरह उलझती है कि न निगलते बनता है और न ही उगलते। ‘कस्तूरी का सुकून’, ‘पकौड़ियां’, ‘आज फिर तारीख़’, ‘वो काली डायरी’, ‘वीसीआर’, ‘कर्तव्य’, ‘मन का बोझ’, ‘ताना’, ‘वि’, ‘श्रीकांत बाबू’, ‘अनामिका’, ‘चाबी की गुड़िया’, ‘असर’ आदि सभी कहानियां दैनिक जीवन में घटित घटनाओं से प्रेरित हैं। आपसी रिश्तों में संवाद न हो तो काफी कुछ पीछे छूट जाता है, ‘तुम बात तो करते’ कहानी यही कहती है कि संवाद बहुत जरूरी है।
संग्रह की सभी कहानियां छोटी हैं। लेखिका ने बहुत ही सरल और प्रभावी भाषा का प्रयोग किया है।

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