स्तन की गांठों को छोटे से छिद्र के द्वारा निकाला जा सकता है- डा सुधि
लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप का सफल आयोजन
देशभर से 100 प्रतिभागियो ने की सहभागिता
मेरठ । स्तन में पड़ी गांठों को नयी तकनीक से बिना निशाान के निकाला जा सकता है। इसमें महिलाओं के स्तर पर किसी प्रकार को कोई निशान नहीं आता है। रविवार को न्यूटिमा हॉस्पिटल में स्तन रोगों के आधुनिक उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में "Scarless Breast Lump Excision" पर आधारित लाइव ऑपरेटिव वर्कशॉप का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से 100 से अधिक प्रतिभागियों ने ऑफलाइन एवं ऑनलाइन माध्यम से उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की मुख्य सर्जन डा़. सुधि ए काम्बोज ने प्रतिभागियों के समक्ष दो जटिल मामलों का सफल लाइव प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि 'फाइब्रोएडेनोमा' आमतौर पर हानिरहित (benign) होते हैं. लेकिन अधिकांश मरीज इन्हें लेकर असहज रहते हैं और इन्हें हटवाना चाहते हैं। पारंपरिक सर्जरी में दिया गया चीरा अक्सर स्पष्ट दिखाई देता है, जो मरीजों के लिए स्वीकार्य नहीं होता।डॉ. कम्बोज ने इस नई तकनीक की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें एक विशेष मशीन एवं पेन-प्रोव के माध्यम से, अल्ट्रासाउंड गाइडेंस में, स्तन में एक छोटे से छिद्र द्वारा सभी गांठों को एक ही सिटिंग में निकाला जा सकता है। इस प्रक्रिया में स्तन को न्यूनतम क्षति पहुँचती है और लगभग कोई निशान नहीं रहता, जिससे यह तकनीक मरीजों के बीच अत्यंत स्वीकार्य बन रही है। इस मौके पर डा उषा शर्मा , डा अनुपम सिरोही, डा. इशा खनूजा, डा शरद कुमार, डा धीरज बालियान, डा उंमग मित्तल, डा. प्रियंका गर्ग, डा राजीव रस्तोगी, डा चैनी जेन, डा मीना बैम्बी, डा, सरिता त्यागी, डा स्नेह लता आदि मौजूद रही।
डेढ घंटे में तीन महिलाओं की सफलतापूर्वक की गयी सर्जरी
लाइव वर्कशॉप में चिकित्सकों की टीम ने तीन महिलाओं के स्तन में गांठों की सर्जरी की गयी। इस दौरान सर्जरी करने में मात्र डेढ घंटे का समय लगा । यह अपने आप में एक उपल्बिध है।


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