नोटिस में नामों की गड़बड़ी को लेकर लोगों में  रोष

 सहारनपुर व मुजफ्फ‍र नगर से स्टाफ को बुलाकर  चस्पा कराए जा रहे नोटिस 

 भूंखड़ व मकान के कई बिक चुके नोटिस  में मूल आंवटी का नाम 

नामान्तरण न होने से खडी हो रही परेशानी 

 मेरठ। कोर्ट के आदेश पर  शास्त्रीनगर  स्कीम नंबर 7 में आवास एवं विकास परिषद ने 500 से अधिक संपत्तियों पर नोटिस जारी किए हैं। सेटबैक और अवैध निर्माण को लेकर कार्रवाई से लोग परेशान हैं और नोटिस में नामों की गड़बड़ी को लेकर रोष भी बढ़ रहा है। काफी संख्या में मकान व व्यवसायिक भूख्ंड है जिसमें मूल आंवटी के नाम नोटिस चस्पा किए गये है। नामान्तरण् न होने से अब मूल आंवटी को तलाश करने में काफी परेशानी हो रही है। 

मेरठ सेंट्रल मार्केट मामले में आवास एवं विकास परिषद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लगातार आवंटियों को नोटिस जारी जारी कर रहा है। ये नोटिस सेटबैक छोड़ने और अवैध निर्माण हटाने के लिए दिए जा रहे हैं। शास्त्रीनगर के सेंट्रल मार्केट की स्कीम नंबर सात में 500 से अधिक लोगों को नोटिस मिल चुके हैं। मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से भी स्टाफ बुलाकर आठ टीमें नोटिस चस्पा कर रही हैं।विभाग के दस्तावेजों में मूल आवंटी के नाम से नोटिस भेजे जा रहे हैं जबकि कई संपत्तियों में अब अन्य लोग रह रहे हैं, जिससे वे परेशान हैं। सेक्टर-2 शास्त्रीनगर में अल्प और दुर्बल आय वर्ग के काफी भवन हैं। इन आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

नोटिस चस्पा होने वालो की सूची 

योजना में कुल 630 भवन और 230 भूखंड हैं। इनमें से 661/6 का ध्वस्तीकरण 25 व 26 अक्तूबर 2025 को हो चुका है। इसके अतिरिक्त, 8 अक्तूबर को 44 संपत्तियों पर सील लगाई जा चुकी है। अब विभाग शेष 815 संपत्तियों के लिए नोटिस जारी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इन सभी लोगों को 15 दिन में सेटबैक छोड़ने को कहा गया है। अनधिकृत निर्माण स्वयं हटाने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।

स्कीम नंबर सात में 50 वर्ग मीटर तक के 249 भवन हैं। 100 वर्ग मीटर तक के मकानों की संख्या 22 है। इस योजना में 50 वर्ग मीटर तक का एक भूखंड भी शामिल है। 51 से 100 वर्ग मीटर तक के कुल 17 प्लॉट हैं। यदि दुकानदार निर्धारित अवधि में निर्माण ध्वस्त नहीं करते हैं, तो जिला प्रशासन कार्रवाई करेगा। ध्वस्तीकरण का सारा खर्चा संबंधित दुकानदारों से वसूला जाएगा।

नोटिस में खामियों पर रोष

विभाग ने मंदिर, जिम और कॉम्प्लेक्स जैसी संपत्तियों को भी नोटिस जारी किए हैं। लोगों में नोटिस में नामों को लेकर काफी परेशानी है। कई संपत्तियां कई बार बिक चुकी हैं, लेकिन नोटिस मूल आवंटी के नाम से आ रहे हैं। तमाम आवंटियों ने अभी तक नामांतरण प्रक्रिया पूरी नहीं की है। इसके कारण दस्तावेजों में उनका नाम दर्ज नहीं हो सका है।

 सेटबैक नियमों में भिन्नता

एक ही क्षेत्रफल के अलग-अलग भवनों में सेटबैक छोड़ने के निर्देश भिन्न हैं। इससे लोगों में विभाग के प्रति रोष व्याप्त है। कुछ मामलों में एक आवंटी को फ्रंट और बैक दोनों सेटबैक छोड़ने को कहा गया है। वहीं, उसी क्षेत्रफल के पड़ोसी भवन स्वामी को केवल आगे ही सेटबैक छोड़ने का निर्देश मिला है। यह भिन्नता लोगों के बीच असंतोष का कारण बन रही है। विभाग को इन विसंगतियों को दूर करने की आवश्यकता है। सबसे ज्यादा उन लोगों को परेशानी हो रही है। जिसने मूल आंवटी ने मकान व भूंखड खरीद कर अन्य से मकान दुकान  बनाए थे। मानान्तरण न होने के कारण  नोटिस मूल आंवटी को जारी किए गये है। अब मूल आंवटी को तलाश करने में लोगों को पसीने आ गये है। 

 अब सवाल उठता है। तमाम पेचेदगियों के बीच कैसे 15 दिनों के अंदर अवैध निर्माण हट पाएंगे काफी मुश्किल साबित होता दिखाई दे रहा है। 


No comments:

Post a Comment

Popular Posts