अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत रही बेनतीजा! 

जेडी वेंस बोले- 'ईरान ने ठुकराईं अमेरिकी शर्तें', वापस लौटे 

 सीजफायर टूटने से फिर से बढे युद्ध के आसार 

 इस्लामाबाद ,एजेंसी।  ईरान-अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में कई घंटों तक चली उच्च स्तरीय कूटनीतिक चर्चा के बाद एक बेहद निराशाजनक खबर सामने आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। वेंस ने इसे ईरान के लिए एक 'बुरी खबर' बताया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के बाद मीडिया से बात की। वेंस ने कहा कि दोनों पक्ष किसी ऐसे नतीजे पर नहीं पहुंच सके जो दोनों को स्वीकार्य हो। वेंस के अनुसार, अमेरिका ने अपनी शर्तें और रेड लाइन्स बिल्कुल स्पष्ट कर दी थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं करने का फैसला किया। घंटों की माथापच्ची के बाद भी दोनों देशों के बीच बने गतिरोध को तोड़ा नहीं जा सका। वेंस ने कहा, 'हम अभी तक ईरानी पक्ष को स्वीकार्य समझौते तक नहीं पहुंच पाए हैं।'

'ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर'

जेडी वेंस ने इस विफलता पर सख्त लहजे में कहा कि समझौते का न होना अमेरिका से कहीं ज्यादा ईरान के लिए नुकसानदेह साबित होगा। वेंस ने बताया कि, अमेरिका ने यह साफ कर दिया था कि वह किन मुद्दों पर लचीला रुख अपना सकता है और किन चीजों पर बिल्कुल समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा, 'बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंचे। लेकिन मुझे लगता है कि यह अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए कहीं ज्यादा बुरी खबर है।'

परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी चाहता है अमेरिका

बातचीत बेनतीजा खत्म होने के बावजूद वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि उसका मुख्य लक्ष्य ईरान को परमाणु शक्ति बनने से रोकना है। जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका को तेहरान की ओर से एक ठोस और स्थायी प्रतिबद्धता चाहिए कि वे न तो परमाणु हथियार बनाएंगे और न ही उन्हें जल्द विकसित करने वाली तकनीक जुटाएंगे। वेंस के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप का सबसे बड़ा लक्ष्य यही है। हालांकि उन्होंने माना कि ईरान का मौजूदा परमाणु कार्यक्रम काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है, लेकिन भविष्य के इरादों को लेकर संदेह अब भी बरकरार है। अमेरिका को उम्मीद है कि भविष्य में ईरान इस दिशा में सकारात्मक कदम उठाएगा।

इस्लामाबाद वार्ता में क्या थे मुख्य विवाद?

परमाणु कार्यक्रम: ईरान के संवर्धित यूरेनियम और भविष्य की परमाणु क्षमताओं पर अमेरिका की सख्त शर्तें।

लेबनान और हिजबुल्लाह: ईरान द्वारा लेबनान में इजरायली हमलों को रोकने की मांग, जिसे अमेरिका और इजरायल पहले ही समझौते से बाहर बता चुके थे।

होर्मुज जलसंधि: इस समुद्री मार्ग पर ईरान का नियंत्रण और 'टैक्स' वसूलने की कोशिशें।

अब आगे क्या?

बातचीत के विफल होने के बाद अब पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका है। 14 दिनों का जो अस्थायी संघर्ष विराम चल रहा था, वह अब और भी नाजुक हो गया है। बातचीत में सहमति नहीं बनने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव फिर से शुरू होने का खतरा मंडराने लगा है। अमेरिका ने दावा किया है कि होर्मुज में बारूदी माइंस को हटाने के लिए अपने दो जंगी जहाज उतारे हुए है। अब दोनों के बीच कोई समझौता न होने की स्थिति में ईरान की तरफ से इस पर जवाबी कार्रवाई हो सकती है क्योंकि ईरान ने युद्ध शुरू होने के बाद से ही होर्मुज में नाकेबंदी की हुई है।

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