सच्चा शासन वही, जहां प्रजा सुखी रहे: सीएम योगी

- सैफई और परिवारवाद का जिक्र कर विपक्ष पर बरसे
लखीमपुर खीरी (एजेंसी)।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को भारत-नेपाल सीमा पर स्थित पलियाकलां के चंदनचौकी पहुंचे। यहां उन्होंने न केवल विकास की बयार बहाई, बल्कि दशकों से अपने हक का इंतजार कर रहे थारू जनजाति के परिवारों को जमीन का पूर्ण स्वामित्व (मालिकाना हक) सौंपा।
जनता को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने श्लोक सुनाया। कहा कि प्रजा सुखे सुखं राज्ञः प्रजानां च हिते हितम्... यानि सच्चा शासन वही है, जहां प्रजा सुखी रहे। राज्य की जनता का कल्याण हो। शासन की खुशी का आधार उसकी जनता की खुशी है। यह कार्य तभी होता है जब शासन सत्ता में संवेदना होती है। बिना भेदभाव के काम हो। आज जो काम हो रहा है ये उसी संवेदना का काम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों में संवेदनाओं का अभाव था। अपने परिवारवाद से ऊपर उठ पाते तो इन थारू परिवारों के बारे में सोच पाते, लेकिन जिनको समाज को बांटने से फुसरत न हो, सदैव बांटने का काम किया हो। जिन्होंने आपके संसाधन और हकों पर डकैती डालने का काम किया होगा। उनसे यह उम्मीद करना है कि वे आपको आपका अधिकार दिलाएंगे, कभी नहीं दिलाते।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपकी पहचान को खत्म करने पर उतारू थे। याद करिए आपको अधिकार तो नहीं मिल पाया, आपके नौजवानों के सामने पहचान का संकट जरूर खड़ा कर दिया था। कहीं माफिया का संकट तो कहीं गुंडों का संकट, कहीं कर्फ्यू का संकट, लेकिन जिस जमीन पर आपने सपने बोए थे। आज उस सपने को डबल इंजन की सरकार ने आकार दिया है। आपको जमीन का भौमिक अधिकार दिया है। आज वर्षों का इंतजार खत्म हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले विकास और सभी योजनाएं सैफई में होती थीं। प्रदेश के गरीबों के हकों पर डकैती डालकर एक परिवार सबकुछ हजम कर जाता था।  
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज का कार्यक्रम केवल अधिकार प्राप्त करने का आयोजन नहीं है, अधिकार से आत्मसम्मान मिलना और आत्मनिर्भरता की गारंटी है। अब वन विभाग के लोग आपके अधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोई लेखपाल आपके क्षेत्र में गड़बड़ी कर दबंग से कब्जा नहीं करा सकता है। याद करिए इसके लिए आपकी कई पीढ़ियां चली गई। दशकों की अधूरी यात्रा आज इस पुनर्वास कार्यक्रम के साथ आगे बढ़ रही है।

थारू परिवारों को सौंपा स्वामित्व अधिकार पत्र
इस दौरान सीएम योगी ने पलिया तहसील के 34 गांवों के 4356 थारू परिवारों को 538 हेक्टेयर जमीन के स्वामित्व संबंधी अधिकार पत्र दिए।  1976 से ये परिवार सिर्फ जमीन का उपयोग कर रहे थे, अब वे इसके मालिक बन गए हैं। इसके अलावा विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इसमें सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं।

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