कब्जा लेने पहुंची मेडा टीम का विरोध किया
लोहियानगर के किसानों ने कहा पूरा मुआवजा और प्लॉट मिलने से पहले एक इंच जमीन नहीं देंगे
मेरठ।लोहिया नगर क्षेत्र में शुक्रवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) की टीम किसानों की जमीन पर कब्जा लेने पहुंची, जहां किसानों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। काजीपुर, गंगानगर और वेद व्यासपुरी क्षेत्र के किसानों ने साफ तौर पर कहा कि जब तक उनका बकाया मुआवजा और प्लॉट नहीं मिल जाता, वे किसी भी कीमत पर जमीन नहीं देंगे।
किसानों ने मेडा की टीम के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2011 में पास होने के बाद 2015 में लागू की गई योजना के तहत उन्हें मुआवजा और प्लॉट दिया जाना था। हालांकि कुछ किसानों को आंशिक भुगतान मिला है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में किसान अपने हक से वंचित हैं। इसी को लेकर लंबे समय से उनका विरोध जारी है। शुक्रवार को जब एमडीए की टीम काजीपुर क्षेत्र में जमीन पर कब्जा लेने पहुंची तो किसानों ने एकजुट होकर टीम को रोक दिया। किसानों ने नारेबाजी करते हुए "जय जवान, जय किसान" और एमडीए के खिलाफ विरोध जताया। उनका कहना है कि प्रशासन पहले उनका पूरा प्रतिकार (मुआवजा) और प्लॉट आवंटन सुनिश्चित करे, उसके बाद ही वे जमीन देने पर विचार करेंगे।
प्रदर्शन कर रहे किसानों के साथ मौजूद सपा नेता गौरव काजीपुर ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने साफ कहा कि "एक इंच भी जमीन एमडीए को नहीं दी जाएगी। अगर प्रशासन द्वारा जबरन दबाव बनाया जाता है तो सभी किसान एकत्र हसेकर बड़ा आंदोलन करेंगे। किसानों का कहना है कि कई बार प्रशासन से वार्ता के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
वेदव्यासपुरी में जारी है अनिश्चितकालीन धरना
गंगानगर, लोहियानगर और वेदव्यासपुरी में एक ही योजना के तहत कार्य हुआ है। किसानों के अनुसार सभी जगह उनको पूरा मुआवजा और प्लॉट नहीं मिला है। इसी के विरोध में वेद व्यासपुरी में भी पिछले कई महीनों से अनिश्चितकालीन धरना जारी है।
जमीन पर शिफ्ट होना है बस अड्डा
दरअसल शोहराब गेट डिपो को लोहिया नगर में शिफ्ट होना है। वहां पर मॉडल बस अड्डा बनना है। मेडा ने एक साल के लिए रोडवेज को शैक्षिक जमीन किराए पर दी है।
रोडवेज के रीजनल मैनेजर ने मेडा को पत्र लिखकर जमीन देने के लिए कहा था। जिस पर मेडा वी सी ने पुलिस प्रशासन से फोर्स मांगा था । जिससे जमीन खाली हो जाए। रोडवेज को कब्जा दिया जा सके।लेकिन वह हो न सका। किसानों की न के आगे मेडा के आधिकारी बैक फुट पर आ गए।



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