‘बेटी हुई है’ कार पर यह बैनर लगाकर पूरे शहर को बता दिया
सजी कारों में अस्पताल से जच्चा-बच्चा को लेकर पहुंचे घर
बेटी के जन्म पर परिवार ने मनाया जश्न
मेरठ। एक समय बेटियों के जन्म पर परिवारों में जहां कम उत्साह दिखाई देता था, लेकिन अब बदलाव का दौर है। मंगलवार को शहर के एक दृश्य ने इसके संकेत दिए हैं। यह दृश्य केवल एक परिवार की खुशी नहीं, बल्कि समाज में बदलती सोच का संदेश दे रहा है। बेटी के जन्म को सार्वजनिक उत्सव की तरह मनाना दर्शाता है कि नई पीढ़ी बेटियों को सम्मान, गर्व और खुशहाली के रूप में स्वीकार कर रही है।
यही सोच समाज में सकारात्मक बदलाव की सबसे मजबूत आधारशिला बन रही है। शनिवार को गुलाबी गुब्बारों से सजी दो कार सड़क पर आगे बढ़ रही थी। कारों के आगे पीछे बैनर लगे थे ‘बेटी हुई है’। कार के सड़क पर घूमने पर देखने वाले लोगों की भीड़ जमा थी। उस दृश्य को लोग अपने मोबाइल में कैद कर रहे थे। उसके बाद उक्त वीडियो को कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भी वायरल कर दिया, जो खास चर्चा का विषय बना रहा है।
बिजौली गांव निवासी कमल सिंह खानपुर के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक हैं। उन्होंने बेटे शुभम खटाना की शादी 14 दिसंबर 2024 काे प्रियंका के साथ की थी। प्रियंका खटाना ने पीवीएस माल के समीप डा. सुधा सिंह के नर्सिंग हाेम पर पांच अप्रैल को बेटी को जन्म दिया। पांच अप्रैल की सुबह से ही परिवार को जब नन्ही बिटिया के जन्म की सूचना मिली तो घर और अस्पताल में जश्न मनाया।
मंगलवार को अस्पताल से प्रियंका और बेटी को घर ले जाने के लिए दो कारों को गुलाबी गुब्बारों से सजाकर अस्पताल पहुंचे। अस्पताल परिसर में भी परिवार और चिकित्सकों ने बच्ची का स्वागत किया। इसके बाद नवजात को विशेष अंदाज में घर लाया गया। शुभम खटना का कहना है कि बेटी और बेटा में हमारे लिए कोई अंतर नहीं है। हमने बेटी को लक्ष्मी के रूप में माना है, हमारे घर बेटी के रूप में लक्ष्मी आई है। परिवार ने इसे लक्ष्मी का आगमन मानकर उत्सव की तरह मनाने का निर्णय लिया।
इसलिए रखा जाएगा नाम ‘प्रिशा’
शुभम ने बताया कि प्रिशा एक लोकप्रिय संस्कृत मूल का हिंदू स्त्री नाम है, जिसका अर्थ 'ईश्वर का उपहार' 'प्रिय', या 'प्यारी' होता है। यह नाम सकारात्मकता, दिव्य आशीर्वाद और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। यह नाम कन्या राशि के अंतर्गत आता है और आधुनिक समय में बहुत पसंद किया जाता है। इसलिए नवजात का नाम प्रिशा रखने का निर्णय लिया है।
पढ़ाई ने बदली परिवार की सोच
शुभम ने कहा कि हाईस्कूल से लेकर सिविल सर्विस के रिजल्ट में बेटियों ने परचम लहराया है। बेटियां भी परिवार को नाम रोशन करती है। ऐसे में बेटी के जन्म लेने पर पूरे परिवार में खुशी है, इस खुशी को हमने जन्म का रूप दे दिया है। कमल खटना का कहना है कि हम मानते है कि शिक्षा की वजह से पूरा परिवार बेटी को लक्ष्मी मान रहा है।


No comments:
Post a Comment