हमें AI से डरने की ज़रूरत नहीं है : प्रोफेसर सगीर एफ्राहीम
आज हम उर्दू में AI से बहुत फ़ायदा उठा सकते हैं : डॉ. अब्दुल हई
उर्दू विभाग, सीसीएस विश्वविद्यालय में “भाषाओं के विकास में AI की भूमिका” विषय पर ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित
मेरठ।उर्दू विभाग, सीसीएसयू के तत्वावधान में “भाषाओं के विकास में AI की भूमिका” विषय पर एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर जमाल अहमद सिद्दीकी ने अपने संबोधन में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने कहा कि AI मानव की सहायता के लिए है, इसलिए इसे अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए और समझदारी से इसका उपयोग करना चाहिए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक प्रोफेसर सगीर अफराहीम ने की। उन्होंने कहा कि हमें AI से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि सावधानी के साथ इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को इस तकनीक को सीखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन साथ ही सतर्क रहने की भी सलाह दी।
विशिष्ट अतिथियों में डॉ. अब्दुल हई, डॉ. जावेद रसूल सहित अन्य विद्वानों ने भाग लिया। डॉ. अब्दुल हई ने कहा कि आज के समय में जानकारी ही सबसे बड़ी शक्ति है और AI के माध्यम से उर्दू भाषा में बहुत लाभ उठाया जा सकता है। डॉ. जावेद रसूल ने AI को एक नई सांस्कृतिक स्थिति बताते हुए कहा कि यह भाषा और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर असलम जमशेदपुरी ने कहा कि AI आज छात्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हो गया है और इसके माध्यम से शोध तथा रचनात्मक कार्यों में काफी सुविधा हुई है।
कार्यक्रम का प्रारंभ तिलावत-ए-क़ुरआन से हुआ, जबकि संचालन सैयदा मरियम इलाही ने किया। इस अवसर पर शोधार्थियों और अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि AI एक क्रांतिकारी तकनीक है, जिसके सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। इसलिए इसका उपयोग विवेक और सावधानी के साथ करना समय की आवश्यकता है।
डॉ. आसिफ अली, डॉ. शादाब अलीम, डॉ. अलका वशिष्ठ फरहत अख्तर, मुहम्मद शमशाद और दूसरे स्टूडेंट्स प्रोग्राम से जुड़े थे।


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