इलाहाबाद हाईकोर्ट से सपा सांसद अफजाल अंसारी को राहत
गिरफ्तारी पर लगी रोक, कई अहम मामलों पर भी सख्त टिप्पणी
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर से समाजवादी पार्टी के सांसद अफजाल अंसारी की गिरफ्तारी पर फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 मई को तय की है। यह मामला वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा हुआ है, जिसमें उनके खिलाफ मोहम्मदाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
पुलिस द्वारा जांच पूरी करने के बाद अफजाल अंसारी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, जिसके आधार पर ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए समन जारी किया था। इसके खिलाफ अफजाल अंसारी ने ट्रायल कोर्ट की पूरी कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए उन्हें राहत प्रदान की है।
इसी बीच हाईकोर्ट में अन्य मामलों की सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी सामने आईं, जिनसे न्यायिक रुख काफी सख्त दिखाई दिया।
सुल्तानपुर में एक युवक की हत्या के मामले में सामने आया कि उसे लाठी डंडों और कुल्हाड़ी से पीटकर मार डाला गया। बताया गया कि गांव में प्रधान के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर पुरानी रंजिश चल रही थी। इसी विवाद के चलते युवक पर घात लगाकर हमला किया गया। घायल युवक की लखनऊ ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच के लिए दो टीमों का गठन किया गया है।
इसी तरह एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों की जांच को लेकर मानवाधिकार आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि जब मॉब लिंचिंग जैसी गंभीर घटनाएं होती हैं, तब आयोग की भूमिका अपेक्षाकृत निष्क्रिय दिखाई देती है, जबकि वह मदरसों की जांच जैसे मामलों में सक्रिय नजर आता है। कोर्ट ने मदरसों की ईओडब्ल्यू जांच को प्रथम दृष्टया कानूनी रूप से सवालों के घेरे में बताया है।
इसके साथ ही किन्नर समुदाय द्वारा नेग के नाम पर की जाने वाली वसूली को लेकर लखनऊ खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि इसे कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना विधिक आधार के धन वसूलना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है।

No comments:
Post a Comment