सर्वोच्च न्यायालय की दहलीज पर सुभारती के विधि छात्र: शैक्षणिक भ्रमण ने बढ़ाया ज्ञान और आत्मविश्वास
मेरठ। स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के सरदार पटेल सुभारती विधि संस्थान द्वारा बी.ए. एलएल.बी. पंचम वर्ष के छात्रों के लिए भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय का एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक भ्रमण आयोजित किया गया। यह ज्ञानवर्धक यात्रा राजेश चंद्र (पूर्व न्यायमूर्ति, इलाहाबाद उच्च न्यायालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) के निर्देशन तथा विधि संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) रीना बिश्नोई के मार्गदर्शन में संपन्न हुई।
इस शैक्षणिक यात्रा का उद्देश्य छात्रों के विधिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ते हुए उनके आत्मविश्वास को सुदृढ़ करना था। भ्रमण के दौरान छात्रों ने सर्वोच्च न्यायालय परिसर में स्थित कोर्ट नंबर 1 के सामने स्थापित काली कांस्य प्रतिमा का अवलोकन किया, जिसे 20 फरवरी 1978 को स्थापित किया गया था। प्रख्यात कलाकार चिंतामणिकर द्वारा निर्मित यह प्रतिमा ‘भारत माता’ को माँ और शिशु के रूप में दर्शाती है, जो नवोदित भारतीय गणराज्य का प्रतीक है। इसके पश्चात छात्रों ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान के शिल्पकार डॉ. बी.आर. अंबेडकर की प्रतिमाओं के दर्शन कर उनके विचारों और योगदान को स्मरण किया। छात्रों ने कोर्ट नंबर 1 का भी अवलोकन किया, जहां भारत के मुख्य न्यायाधीश की पीठ द्वारा मामलों की सुनवाई होती है और उसका सीधा प्रसारण किया जाता है। इसके साथ ही उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समृद्ध पुस्तकालय का भ्रमण किया, जहाँ संविधान की प्रतिकृति सहित चार लाख से अधिक पुस्तकों का विशाल संग्रह उपलब्ध है।
भ्रमण में प्रकृति, आरती, दीया, अदिति, सुमन, अबुजर, साजर, आयुष, देवांश, यश, सुमन, अनामिका, प्रेरणा, रितिका, अनुपम, अवनी, राहुल प्रथम, राहुल द्वितीय, गोविंदा, व्योम, तापी तारी, जीशान आदि छात्र उपस्थित रहे। यह शैक्षणिक भ्रमण न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि उन्हें विधि क्षेत्र की गहन समझ प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक सशक्त कदम भी बना।


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