स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में बिजली कंपनियों की मनमानी पर लगेगी लगाम
जबरन प्रीपेड कन्वर्जन के मामले में विद्युत नियामक आयोग का बड़ा निर्णय
पावर कॉरपोरेशन के एमडी व अध्यक्ष से 10 दिन में मांगा जवाब
उपभोक्ता परिषद के बिजली कंपनियों और पावर कॉरपोरेशन पर गंभीर आरोप
मेरठ । प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) तथा भारत सरकार एवं केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के निर्देशों के विपरीत जाकर उपभोक्ताओं को गुमराह करने का गंभीर मामला सामने आया है।
आरोप है कि कॉस्ट डाटा बुक के अध्याय-4 'सिक्योरिटी' में दी गई व्यवस्था का गलत अर्थ निकालते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन कंवल प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं तथा मौजूदा पोस्टपेड कनेक्शनों को उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही प्रीपेड मोड में परिवर्तित किया जा रहा है। जबकि कॉस्ट डाटा बुक में दी गई।
व्यवस्था को विद्युत अधिनियम 2003 व केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा समय पर जारी निर्देशों के तहत लागू करना होता है। इस मुद्दे पर बढ़ते आक्रोश और प्रदेशभर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उत्पन्न स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष अर्जेंसी एप्लीकेशन प्रस्तुत की थी, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप और निर्णय की मांग की गई। विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ता परिषद की एर्जेंसी एप्लीकेशन को उचित मानते हुए महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह के निर्देश पर आयोग के सचिव द्वारा पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष के लिए तत्काल निर्देश जारी किए गए हैं। और 10 दिन में पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं जिनमें यह कहा गया है कि बिजली कंपनियां कॉस्ट डाटा बुक के अध्याय-4 'सिक्योरिटी' की टिप्पणी-5 का उल्लंघन करते हुए लगातार पोस्टपेड कनेक्शनों को प्रीपेड में परिवर्तित कर रही हैं और नए कनेक्शन भी केवल प्रीपेड मोड में ही दिए जा रहे हैं, जिससे उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है।
उपभोक्ता परिषद ने अपने अर्जेंसी एप्लीकेशन में यह भी रेखांकित किया कि भारत सरकार के निर्देश पूरी तरह स्पष्ट हैं कि कॉस्ट डाटा बुक की व्यवस्था को विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) तथा केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुरूप ही लागू किया जाना चाहिए। इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर
कॉरपोरेशन से 10 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब बिजली कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां गलत जवाब देती हैं या भारत सरकार के आदेशों का उल्लंघन जारी रखती हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है उपभोक्ता परिषद ने पहले ही बिजली कंपनियों द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47 (5) के उल्लंघन के लिए अवमानना याचिका दाखिल कर रखी है ऐसे में अब उनके खिलाफ कार्रवाई से उन्हें कोई नहीं बचा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि उपभोक्ता परिषद उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जब तक प्रत्येक उपभोक्ता को न्याय नहीं मिल जाता तथा दोषी कंपनियों पर कठोर कार्रवाई नहीं होती, तब तक परिषद अपना संघर्ष जारी रखेगी।

No comments:
Post a Comment