मेरठ कॉलेज में ऐतिहासिक संग्रहालय की होगी स्थापना: कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह
मेरठ। आजादी का इतिहास जानने के लिए मेरठ में ऐतिहासिक डिजिटल संग्राहलय की स्थापना की जाएगी। उक्त घोषणा मेरठ कॉलेज एवं उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह ने की।
विधि विभाग के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। वहीं, कॉलेज की तरफ से अतिथियों का स्वागत किया गया। इसके बाद मंत्री ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में ऋषि मुनियों ने सर्वे भवंतु सुखिन: की कल्पना की है। इससे मानव कल्याण की सनातन परंपरा को स्थापित किया। देश पर सैकड़ों वर्षों तक मुस्लिम एवं अंग्रेज शासकों ने राज किया। अब आकर वैचारिक आजादी मिली है। मौजूदा सरकार ने भारतीय ज्ञान परंपरा का संवर्धन कर सभी क्षेत्र में पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित किया है। जिससे वैदिक एवं सनातन परंपरा के बच्चे निकट भविष्य में विश्व गुरु का सपना पूरा कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि देश एवं प्रदेश सरकार ने नीतिगत तरीके से पर्यटन एवं संस्कृति को समृद्ध किया है। उन्होंने घोषणा की कि इतिहास को जानने के लिए मेरठ में ऐतिहासिक डिजिटल संग्राहलय की स्थापना के प्रयास जारी हैं। इसे शीघ्र ही मूर्त रूप दिया जाएगा।
अंग्रेजों ने भारत को मदारी एवं सपेरों का देश बताया
इनके पश्चात विशिष्ट अतिथि जुडिशल मजिस्ट्रेट शांतनु त्यागी ने कहा कि भारतीय ऋषि-मुनियों ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। उनके शोध को अपनाकर ही दुनिया आधुनिक होने का दंभ भरती है। इसके बावजूद ब्रिटिश एन्साइक्लोपीडिया से पता चलता है कि अंग्रेजों ने भारत को मदारी एवं सपेरों का देश बताया है। उन्होंने बड़े सुनियोजित तरीके से देश की छवि धूमिल की। त्यागी ने बताया कि शून्य तथा उसके नियम के लिए ब्रह्मगुप्त एवं ज्यामितीय के लिए सुल्बसूत्र की अहम भूमिका रही है। इतना ही नहीं भौतिकी में गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत का ऋषि कणाद अपने दर्शन वैशेषिक में सदियों पहले वर्णन कर चुके हैं। वहीं, ऋषि सुश्रुत दुनिया के पहले सर्जन थे। उन्होंने प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में तमाम शोध किए। हालांकि सुश्रत संहिता में जाति का कोई जिक्र नहीं है। जिस तरह से आज भारतीय समाज को जाति में बांटा जा रहा है।
भारतीय ज्ञान परंपरा पर पुनः चिंतन करने की आवश्यकता
कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा पर पुनः चिंतन करने की आवश्यकता है। पूर्व में भारतीय शिक्षा, संस्कृति एवं न्याय व्यवस्था को नष्ट किए जाने के कुत्सित प्रयास किए गए हैं। लॉर्ड मैकाले की हीनता के भाव ने वैज्ञानिक शोधों में ग्रहण का काम किया है। अब हम भारतीय ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने लाकर हीन भावना पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विचार के स्तर पर जिया जाने वाला सऊर तथा सबको स्वीकार करने की अनोखी परंपरा है हमारे यहाँ सदियों से मौजूद है। उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में विमर्श किए जाते रहना चाहिए। वहीं इसमें सवाल उठाए जाने की स्वतंत्रता सभी को प्राप्त है। हालांकि पश्चिमी सभ्यता में सवाल उठाए जाने पर मृत्यु दंड दिए जाने की घटनाएं इतिहास में दर्ज हैं।
कॉलेज प्रबंध समिति सचिव विवेक गर्ग ने उक्त विचारों का अनुसरण कर शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जाने पर जोर दिया। वहीं, महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर युद्धवीर सिंह ने कहा कि मेरठ कॉलेज पर दूसरों के जिम्मेदारी का बोझ बेवजह न डाला जाए। जिसे शिक्षकों को पढाई कराने का पर्याप्त समय मिल सके।
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न विषयों के मेधावी छात्राओं को कॉलेज प्रबंधन द्वारा ₹5000 का चेक मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर प्रोफेसर वाचस्पति मिश्र ने कहा कि डिजिटल संग्रहालय बनाने के लिए सरकार के प्रयास में कॉलेज जमीन उपलब्ध कराकर मदद करने के लिए तैयार है। इस अवसर पर भाजपा के जिलाध्यक्ष विवेक रस्तोगी, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष जिला शिवकुमार राणा आदि समेत अन्य अतिथि उपस्थित रहे। वहीं कार्यक्रम का संचालन प्रोफेसर वाचस्पति मिश्रा एवं प्रोफेसर अल्पना रस्तोगी ने किया तथा आभार प्रो रेखा राणा ने जताया।
मेरठ कॉलेज के कार्यक्रम में बरनावा, अनूपशहर समेत दो गुरुकुलों के छात्र छात्राओं ने भी शिरकत की। वहीं, गुरुकुल प्रबंधकों ने कॉलेज के प्राचार्य से एवं उनके शिक्षकों को गुरुकुल का भ्रमण करने का भी निवेदन किया। जिसे प्राचार्य प्रोफेसर युद्धवीर सिंह ने स्वीकार कर लिया।



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