व्यवसायिक ही नहीं वरन आवासीय प्लाट में भी सैटबेक छोड़ना होगा
मेरठ। सैट्रंल मार्केट के दुकानों के अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने नींद उड़ा रखी है। आवासीय परिरस में भी इस जद में आएगी । जिन्होंने बिन सैटबैक छोड़ निर्माण कर लिया है। उन्हें भी सैटबैक के लिए अवैध निर्माण को तोड़ना होगा। यह बात हम नहीं कर रहे है। बल्कि सुप्रीम कोर्ट का 27 जनवरी 2026 का आदेश कर रहा है।
आवासीय सम्पत्तियों हेतु :-
आवासीय भवन / भूखण्ड का क्षेत्रफल फ्रंट सेटबैक (अग्रभाग) रियर सेटबैक (पश्चभाग) साइड सेटबैक (पार्श्व-1) साइड सेटबैक (पार्श्व-2)
150 वर्ग मी० से कम 1 मी० 0.00 0.00 0.00
150 वर्ग मी0 से 300 वर्ग मी. से कम 3 मी. 1.50 मी. 0.00 0.00
300 वर्ग मी0 से 500 वर्ग मी० से कम 3 मी. 3.00 मी. 0.00 0.00
व्यावसायिक सम्पत्तियों हेतु :-
100 वर्ग मी. से कम 1.5 मी. 0.00 0.00 0.00
100 वर्ग मी0 से 300 वर्ग मी. से कम 3 मी. 0.00 0.00 0.00
300 वर्ग मी0 से 1000 वर्ग मी. से कम 4.5 मी. 3.00 मी. 1.5 मी. 1.5 मी.
नोट :- नए ले-आउट में कोने वाले भूखंडों में पार्श्व सेट-बैक संबंधित भूखंड के अग्रभाग के सेट-बैक के समान ही होगा। पूर्व अनुमोदित ले-आउट में, यदि ले-आउट योजना में सेट-बैक निर्धारित नही है, तो 500 वर्ग मीटर तक के कोने के भूखंड में न्यूनतम पार्श्व सेट-बैक 1.5 मीटर होगा तथा 500 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले कोने के भूखंड में पार्श्व सेट-बैक उपर्युक्त तालिका के अनुसार होगा।
परिषद के सभी आवंटियों से अनुरोध है कि उक्त सेटबैक के क्षेत्र में किये गये निर्माण, जो अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है, उसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के आदेश के क्रम में तत्काल स्वंय हटा ले, अन्यथा परिषद द्वारा अवैध निर्माण पर ध्वस्तीकरण की कार्यवाही की जायेगी।
इस बारे में आवास विकास के अधिकारियों व अधिवक्तािओं से इस बारे में जानकारी लेने का प्रयास किया तो उनका कुछ ये कहना था
इस बारे में आरटीआई एक्टीविस्ट लोकेश खुराना का कहना है। आवास विकास के वास्तु नियाेजक विभाग द्वारा अस्सी भूखंडों के संचालकों को नियमितिकरण के लिए शुल्क जमा कराने के नोटिस जारी किए गये है। इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता है। 25 मार्च को कोर्ट में आवास विकास के हलफनामा दिया जाएगा इसके बाद वह कुछ कह सकते है।
वरिष्ठ अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह धामा का कहना है क्यों कि मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। आवास विकास ने जो भूखंड संचालकों को नियमितिकरण के जो नोटिस जारी किए है। उसमें देखना यह है सुप्रीम कोर्ट उसे मानता है या नहीं । यह कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है।
अधिशासी अभियंता अभिषेक राज निर्माण खंड- एक ने बताया कि जो भी कार्रवाई की जा रही है।वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। जहां तक बात सैटबैक छोड़ने की है। वह तो अवैध निर्माण व्यपारियों को तोड़ना होगा । उसी के बाद ही नियमितिकरण की कार्रवाई की जाएगी।
सैट्रंल मार्केट व्यापार संघ के अध्यक्ष जितेन्द्र अग्रवाल का कहना है कि शासन से शमन के जो नोटिस उन्हें मिले है। वह उनसे संतुष्ट है। जिन व्यापारियों को नोटिस मिले है वह अपना अवैध निर्माण स्वय तोड़ रहे है।
क्या दिया था काेर्ट ने फैसला
सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली में योजित सिविल अपील संख्या-14604/2024 (एस.एल.पी सं.-36440/2014) राजकुमार बड़जात्या एवं अन्य बनाम उ.प्र आवास विकास परिषद एवं अन्य व सिविल अपील संख्या-14605/2024 (एस.एल.पी. सी-1184/2015) राजीव गुप्ता एवं अन्य बनाम उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद एवं अन्य में पारित निर्णय 17.12.2024 के अनुपालन हेतु योजित अवमानना वाद (सिविल) संख्या-877/2025 लोकेश कुमार खुराना बनाम राजेन्द्र कुमार बडजात्या व अन्य में माननीय सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली के आदेश 27.01.2026 का अनुपालन किये जाने हेतु अवैध निर्माण को हटाने हेतु निम्नलिखित तालिका के अनुसार भवनों में सेटबैक छोडा जाना आवश्यक है
दीवार कर छिपा रहे अवैध निर्माण दुकानदार
सुप्रीम कोर्ट के ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद कार्रवाई से बचने के लिए सैंट्रल मार्केट व सैंक्टर दो के दुकानदारों ने दुकानों को शटर को हटा कर राताे रात दीवार का निर्माण कर डाला है। दर्जनों दुकानों की दीवार इस बात को बयां कर रही है। अब देखने वाली बात यह है। आगामी 25 मार्च को कोर्ट में होने वाले सुनवाई में आवास अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करता है। इसके बाद फिर से दुकाने चालू हो पाएंगी या नहीं यह गर्भ में छिपा है।
एलएमवी 4 लगा ट्रांसफार्मर हटाया
शास्त्री नगर के एक दुकानदार ने अपने प्रतिष्ठान में बिजली विभाग से एलएमवी4 का कनेक्शन लिया था । कोर्ट के आदेश के अब दुकानदार ने बिजली विभाग द्वारा लगाए गये ट्रांसफार्मर को हटाना आरंभ कर दिया है। उसका कहना है उसे बडे कनेक्शन की जरूरत नहीं है। सवाल यह उठता है। इतना भारी व्यवसायिक कनेक्शन किस प्रयोजन के लिए लिया गया था


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