जिसे पुलिस ने फर्जी आईएएस बताया उसके परिजनों ने खोली सच्चाई
परिजन बोल 2008 बैच के IAS है राहुल, बर्खास्तगी के खिलाफ CAT में लड़ रहे लड़ाई
मेरठ। थाना नौंचदी में पुलिस जिस आाईएएस अफसर को फर्जी बता कर मीडिया के सामने पेश किया है। वही आईएएस के परिजनों ने पुलिस की पोल खोकर रख दी है। राहुल कौशिक 2008 के आईएएस है फिलहाल वह बर्खास्तगी के खिलाफ केट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे है।
परिवार की मानें तो राहुल ने वर्ष-2008 में UPSC क्रैक किया था, जिसमें उन्होंने 728वीं रैंक हासिल की थी।भाई सौरभ शर्मा ने बताया कि UPSC में चयन के बाद उनके भाई की गाजियाबाद स्थित रफी अहमद किदवई राष्ट्रीय डाक अकादमी (RAKNPA) में ट्रेनिंग चली। दो वर्ष की ट्रेनिंग के बाद वर्ष 2010 में पहली पोस्टिंग दिल्ली मिली। हालांकि इसके बाद उनकी गुवाहाटी, चेन्नई, हैदराबाद, तमिलनाडु जैसे स्थानों पर भी पोस्टिंग रही।सौरभ ने बताया कि उनके भाई राहुल कौशिक पर वर्ष 2017-18 में नौकरी लगवाने का झांसा देकर डेढ़ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप लगा था। इस मामले की जांच हुई, जिसके बाद राहुल को पहले निलंबित और फिर वर्ष 2019 में बर्खास्त कर दिया गया। अपनी बर्खास्तगी के खिलाफ राहुल कोर्ट गए। वर्तमान में उनका मामला सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में विचाराधीन है।
नशे की हालत में अफसर से नोकझोंक
पुलिस की इस कार्रवाई के पीछे की हकीकत भी परिजनों ने बयां की। बताया कि राहुल नौकरी खोने के बाद डिप्रेशन में हैं। कुछ पारिवारिक समस्याओं ने हालत और बिगाड़ दी, जिसके चलते उनकी मानसिक स्थिति भी प्रभावित हो गई। बुधवार देर रात राहुल ने पुलिस के किसी बड़े अफसर को फोन मिलाया। नोकझोंक के बाद रात में ही राहुल को पुलिस ने हिरासत में ले लिया।
शांति भंग की कार्रवाई के बाद छोड़ा
अभी पुलिस राहुल कौशिक को जेल भेजने की तैयारी कर ही रही थी कि कुछ लोग पुलिस अधिकारियों के पास पहुंचे। उन्होंने राहुल कौशिक की शिक्षा से जुड़े कुछ साक्ष्य पेश किए, जिसके बाद पुलिस ने राहुल का शांतिभंग में चालान कर कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने राहुल को जमानत पर छोड़ दिया।
एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह और सीओ सिविल लाइन अभिषेक तिवारी ने गुरुवार को पुलिस लाइन में संयुक्त रूप से प्रेसवार्ता कर खुलासा किया कि फूलबाग कालोनी निवासी राहुल कौशिक पुत्र स्व. रोहताश कुमार शर्मा खुद को IAS बताकर ना केवल आस पड़ौस के लोगों बल्कि पुलिस व प्रशासनिक अफसरों पर भी रौब गालिब करता था।
सुबूत देने के बाद छोड़ा गया
परिजनों को यह जरा भी अंदेशा नहीं था कि पुलिस मामले को प्रेस कान्फ्रेंस तक ले जाएगी। इसका पता चला तो उन्होंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सभी साक्ष्य पुलिस अधिकारियों को उपलब्ध कराए लेकिन तब तक प्रेस कान्फ्रेंस हो चुकी थी। पुलिस ने यू-टर्न लिया और कुछ घंटे बाद ही शांतिभंग की कार्रवाई के बाद राहुल कौशिक को परिजनों की सुपुर्दगी में घर भेज दिया।
पुलिसिया जांच सवालों के घेरे में
इस पूरे मामले के बाद पुलिसिया जांच पर सवालिया निशान लग गए हैं। परिजनों का कहना है कि अफसर को खुश करने की जल्दबाजी में मामले की जांच की ही नहीं गई। अगर पुलिस उनसे संपर्क करती तो वह एक एक साक्ष्य पुलिस के समक्ष रखते लेकिन पुलिस ने सारी मर्यादा ही ताक पर रख दीं।



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