बीएसवी ने समय पर जांच और इलाज के लिए मिलकर काम करने की अपील की
मुज़फ्फरनगर : अप्लास्टिक एनीमिया जागरूकता सप्ताह (1–7 मार्च) की थीम ‘"वॉयसेस ऑफ स्ट्रेंथ एंड होप" है, जिसका मतलब है लोगों को जागरुक करना और उनमें अप्लास्टिक एनीमिया के इलाज को लेकर उम्मीद जगाना।
इस अवसर पर डॉ. पवन कुमार सिंह, वाइस चेयरमैन, हेमेटो ऑन्कोलॉजी एवं बीएमटी, शारदाकेयर हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा, ने कहा - “सीमित जागरूकता, जांच में देरी और विशेष डायग्नोस्टिक सुविधाओं तक असमान पहुंच, अप्लास्टिक एनीमिया के प्रबंधन में प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं। कम कम ब्लड काउंट को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। भारत में अक्सर कम ब्लड काउंट को सामान्य कारणों से जोड़ दिया जाता है, बिना पूरी जांच के। अप्लास्टिक एनीमिया के शुरुआती लक्षण आसानी से नजरअंदाज हो सकते हैं, क्योंकि कई मामलों में इसे अन्य प्रकार के एनीमिया समझ लिया जाता है।
हम एप्लास्टिक एनीमिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने, मरीजों और उनके देखभाल करने वालों की आवाज़ और अनुभवों को सामने लाने, तथा निरंतर चिकित्सा शिक्षा के माध्यम से वैज्ञानिक जानकारी और प्रमाणों को बढ़ाने के लिए काम करते रहेंगे। यह प्रयास केवल जागरूकता सप्ताह तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हर दिन जारी रहेगा। आइए, हम सभी मिलकर एप्लास्टिक एनीमिया के खिलाफ लड़ाई को मजबूत बनाएं और इस बीमारी पर नियंत्रण पाने की दिशा में आगे बढ़ें। ” - शिवानी शर्मा डेका, सीओओ, इंडिया बिजनेस, बीएसवी (मैनकाइंड ग्रुप) ने कहा।अप्लास्टिक एनीमिया एक गंभीर रक्त रोग है, जिसमें बोन मैरो पर्याप्त मात्रा में खून की कोशिकाएं नहीं बना पाता।


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