लोकतंत्र सेनानी चौधरी जयपाल सिंह नौरौजपुर नहीं रहे, गार्ड ऑफ़ ऑनर के साथ पंचतत्व में विलीन
अंतिम विदाई में जिले भर से उमड़े लोग, चौधरी चरण सिंह के करीबी नेता का जाना दुखद
बागपत। लोकतंत्र सेनानी और वरिष्ठ किसान नेता चौधरी जयपाल सिंह का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वे 1930 में जन्मे थे और उनकी आयु 96 वर्ष से अधिक थी। वे एमए पास थे और लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहे। उनके निधन की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
आज सुबह उनके पैतृक गांव नौरौजपुर गुर्जर, जिला बागपत में राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें गार्ड ऑफ़ ऑनर दिया गया और उनके बड़े पुत्र सतपाल सिंह ने मुखाग्नि दी। अंतिम विदाई के समय जिले भर से बड़ी संख्या में लोग उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे।
चौधरी जयपाल सिंह को चौधरी चरण सिंह का करीबी शिष्य माना जाता था। बताया जाता है कि चौधरी चरण सिंह के कहने पर उन्होंने पीसीएस की नौकरी छोड़कर राजनीति का रास्ता चुना और किसानों तथा लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए संघर्ष का जीवन अपनाया।
वे इमरजेंसी के दौरान लोकतंत्र की रक्षा के आंदोलन में सक्रिय रहे और जेल गए। इसके अलावा माया त्यागी कांड के विरोध में हुए ऐतिहासिक आंदोलन में भी वे गंभीर रूप से घायल हुए और लंबे समय तक जेल में रहे।
चौधरी जयपाल सिंह एक समृद्ध सामाजिक और राजनीतिक विरासत से जुड़े थे। उनके बाबा चौधरी भीम सिंह स्वतंत्रता सेनानी थे और डिस्ट्रिक्ट बोर्ड मेरठ के निर्वाचित सदस्य भी रहे थे। इसी विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई।
कौरवी बोली के साथ हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी पर उनकी जबरदस्त पकड़ थी। नफासत और करीने से रहना उनका विशेष गुण था। सियासत में उन्होंने अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। चौधरी चरण सिंह के जीवन और उनके दौर की राजनीति के दिलचस्प किस्से वे इस उम्र में भी पूरे जोश के साथ सुनाते थे। संबंधों को निभाने की कला उनमें अद्भुत थी।
गोरा रंग, इकहरा बदन और कड़क आवाज उनकी पहचान थी। बातचीत में वे कहावतों और किस्से कहानियों का बखूबी इस्तेमाल करते थे जिससे उनकी बातों में अलग ही प्रभाव पैदा हो जाता था। उसूलों पर अडिग रहना, ईमानदारी और अपनी बात के पक्के होना उनकी सबसे बड़ी खूबी मानी जाती थी।
उनके निधन पर क्षेत्र के अनेक राजनीतिक और सामाजिक नेताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया और इसे सियासत के एक बड़े अध्याय का अंत बताया।
पूर्व मंत्री चौधरी ओमवीर तोमर ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह जैसा स्पष्ट वक्ता और गहरी सियासी समझ रखने वाला नेता बागपत के स्थानीय नेताओं में कोई नहीं था। उन्होंने कहा कि वे इमरजेंसी के दौरान जयपाल सिंह के साथ जेल में रहे और उन्होंने हमेशा छोटे भाई की तरह उनका ख्याल रखा।
पूर्व मंत्री डॉ. कुलदीप उज्ज्वल ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह उच्च आदर्शों वाले नेता थे और चौधरी चरण सिंह के पक्के अनुयायी थे। उनका जाना एक युग का अंत है।
डौला गांव निवासी लोकतंत्र सेनानी ठाकुर चमन सिंह ने कहा कि इमरजेंसी के दौरान वे भी जयपाल सिंह के साथ जेल में रहे थे। उनके अनुसार जयपाल सिंह एक निडर और ईमानदार शख्सियत थे।
इस अवसर पर तेजपाल सिंह पिलौना और लोकतंत्र सेनानी धर्मपाल सिंह बाघू ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह पूरे इलाके में बाबूजी के नाम से मशहूर थे।
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि बाबूजी के नाम से ही यह इलाका जाना जाता था।
राष्ट्रीय लोक दल के नेता विश्वास चौधरी ने कहा कि चौधरी जयपाल सिंह भारत रत्न चौधरी चरण सिंह और आज की पीढ़ी के बीच एक महत्वपूर्ण वैचारिक कड़ी थे।समाजवादी पार्टी के नेता नागेंद्र सिंह ने उनके निधन को समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
अंतिम संस्कार के समय डॉ. रविन्द्र प्रताप राणा, रमाला चेयरमैन, तेजपाल सिंह पिलौना, धर्मपाल सिंह बाघू, ओमप्रकाश प्रधान, प्रोफेसर धीरेंद्र सिंह सहित सैकड़ों गणमान्य लोग मौजूद रहे और उन्हें अंतिम विदाई दी।
परिवार में उनकी पत्नी चंद्रवती, पुत्र सतपाल सिंह और यशपाल सिंह तथा चार पौत्र हैं। उनके बड़े भाई साहब सिंह भी लोकतंत्र सेनानी रहे हैं।
चौधरी जयपाल सिंह का जाना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसान राजनीति और लोकतांत्रिक आंदोलनों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के टूटने के रूप में देखा जा रहा है।



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