श्रद्धा के बिना धर्म कार्य नहीं हो सकता - स्वामी ज्ञानानंद महाराज 

 राजवंश भवन में  ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिव्य मानस प्रवचन का आयोजन 

मेरठ। सोमवार को शास्त्री नगर स्थित राजवंश भवन में  ब्रह्मलीन जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज की सातवीं पुण्यतिथि के अवसर पर दिव्य मानस प्रवचन,के प्रथम दिवस पर  ज्योर्तिमठ अवांतर भानपुरा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ  महाराज ने कहा की श्रद्धा के बिना धर्म कार्य नहीं हो सकता, विश्व पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण वस्तु पदार्थ का ज्ञान नहीं हो पता, आधार स्वरूपा भवानी विश्व स्वरूप शिव के अनुरूप के साथ ही अंतःकरण के साथ ही लोक सफल होते हैं।  कहा कि साथ ही गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं होता है,पुस्तक में ज्ञान तो होता है लेकिन गुरु ही उस ज्ञान का ज्ञान देता है।  अन्यथा ज्ञान अभियान हो जाने पर स्वयं व समाज के लिए घातक हो जाता है। इसलिए आंतरिक प्रवृत्ति के लिए गुरु ,इष्ट का आश्रय जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। गुरु के बिना ज्ञान नहीं और बिना गुरु के गति नहीं होती है इसलिए गुरु के चरणों में ही उसे राज्य के समान है जो नेत्रों के माटी को स्वच्छता प्रदान करता है इसीलिए रामचरित्र मानस का श्रवण व पाटन से मनुष्य का उद्धार होता है  रामचरित्र मानस का श्रवण व पाठन  से विवेक बुद्धि रूपी निर्मल सांसारिक बंधन से मुक्ति का मार्ग है।

 प्रातः रामायण का पाठ पंडित पंकज शास्त्री द्वारा कराया गया रामचरित्र मानस का पूजन एव व्यास पीठ पूजन  ज्ञानेंद्र अग्रवाल ने सपत्नीक एवं शांति स्वरूप गुप्ता द्वारा किया गया। मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार में कौशल विकास मंत्र कपिल देव अग्रवाल ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। ओर कहा कि कथा में भाग्य शाली ही पहुंचता है कथा श्रवण मात्र से जीवन में सफलता प्राप्त होती हैं जीस प्रकार बर्तन को माजा धोया जाता तो उसकी शुद्धि होती हे कथा में आना सुनना भी जीवन को शुद्धि करता है।।।

सेवा समिति के अध्यक्ष डॉ अतुल गर्ग ने सभी का स्वागत किया मुख्य संयोजक मनोज गर्ग ने संचालन किया।।        इस मौके पर  मनोजसेन ,अमितगर्ग,आलोक सिसोदिया मनोज गर्ग ,विपिन रस्तोगी ,नरेंद्र राष्ट्रवादी ,हरीश वशिष्ठ, अमित गुप्ता, कृष्ण गोपाल, राकेश कुमार गोयल ,संजय गोयल,पार्षद शांता पुंडीर, संजीव पुंडीर आदि मौजूद रहे।

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