... गया तेल लेने !
- ललिता जोशी
जैसे जल बिन सब सून वैसे ही तेल बिन भी सून । कोई जमाना था जब लड़ाइयां राज्य की सीमाएं बढ़ाने के लिए की जाती थीं या फिर राजा जी को अपने या अपने पुत्र के लिए कोई कन्या पसंद आ जाये तो उसे हासिल करने के लिए युद्ध किए जाते थे । आधुनिक युग के आधुनिक मानव का युद्ध का उद्देश्य ही अलग हो गया है । ये युद्ध दादागिरी और हथियार की बिक्री और तेल लेने के आधिपत्य के लिए किया जा रहा है । तेल उत्पादक देशों पर धौंस जमाकर उन्हें अपने अधिकार में रखने का अनाधिकृत प्रयास करना कहाँ की तमीज है । जनाब परमाणु बम तो बहाना है तेल पर कब्जा जमाना है ।
वेनेजुवेला के राष्ट्रपति को रातोंरात ऐसे उठा कर ऐसे ले गए जैसे चील चूहे पर झपटा मारकर उठा ले जाती है । उन पर आरोप लगा नार्को-आतंकवाद, ड्रग तस्करी और बिग ब्रदर के खिलाफ हथियार रखने का ।अरे भाई किसी ने अगर अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखें है तो किसी को तब तक कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए जब तक कि वो आप पर हथियार न तान दे । मगर आप ताकतवर हो तो इसका मतलब तो ये नहीं है कि किसी राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष को उठा लो । ये तो अंडरवर्ल्ड के गुंडों वाली हरकत हुई ।
इसी बात पर जंगल की कहानी याद आ गई जब एकबार जंगल में बाघ ने निरीह बकरी पर आरोप लगाया कि उसने नदी का पानी जूठा कर दिया और इसी कारण बाघ बकरी को कहता है कि वो उसे खा जाएगा लेकिन बकरी अपनी बुद्धि बल से बाघ को चकमा देकर अपनी जान बचा लेती है लेकिन इंसान की खाल में भेड़िये का लालच तो सभी को हलकान कर रहा है । वैसे जानवर का जब पेट भरा होता है तो वो अनावश्यक किसी को न ही परेशान करते हैं न ही शिकार करते हैं लेकिन इंसान का जब पेट भरा होता है तो उसको खुराफात सूझती है । जब हो पेट भरा तो पहले स्वयं के लिए संचय करेंगे । इसके बाद अपने परिवार और अपनी सात पुश्तों के लिए संचय करते हैं । इसके बाद वो अपना और विस्तार करता है ।
यही हाल है अपने बिग ब्रदर का है । उनका देश खुशहाल देश है । इनके देश में जाना और वहाँ पर बसना अन्य देशों के लोगों का स्वप्न होता है । इनके देश ने जाने कितने ही प्रवासियों को अपने देश में सम्मान सहित बसाया । इतने सम्पन्न होने के बावजूद तेल से भरे देशों पर अपनी नज़र गाड़ना क्या अच्छी बात है ? तेल किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक है । तेल यानि ऊर्जा और गति । तेल उत्पादक देशों ने यदि बिग बी के साथ अपने संबंध ठीक बना लिए तो ठीक है । संबंध ठीक बनाए रखने के नाम पर सभी ने बिग बी को उसके सैन्य ठिकानों के लिए स्थान दे रखें है । जिसने न मानी इनकी धौंस तो समझ लीजिये उसकी नाक में दम करो या उनके राष्ट्राध्यक्ष को रातों -रात उठा लो या फिर कुछ भी करके लड़ाई लगा दो और नई -नई बयान बाज़ियाँ कर खुद को सही सिद्ध करने लग जाओ । बहुत से देशों का भी बेड़ागर्क हो रहा है बिग बी के चक्कर में ।
इस तेल की आंच मे वो देश भी आ गए जो इस युद्ध से कोसों दूर हैं । बिग बी की तेल पिपासा के कारण पूरा विश्व कठिनाइयों का सामना कर रहा है । इनके देशवासी भी इनसे हैरान और परेशान हैं । बम वर्षा तो विनाश और मृत्यु लेकर आती है । इस विभीषिका का भाजन बच्चे, महिलाएँ और वृद्ध बनते हैं । अब तो सबसे ज्यादा असर युद्ध ग्रसित देशों में रहने वाले पालतू जानवरों पर भी पड़ता है । इंसान युद्ध के दौरान अपनी जान बचाने के लिए खुद तो दूसरे देशों की ओर भागते हैं और उन देशों की नागरिकता या आश्रय लेना चाहते हैं जो उन्हें सुरक्षित लगते हैं । अपने को बचाने के लिये पालतू जानवरों को सड़कों पर या जानवरों के शेल्टर होम में छोड़ जाते हैं । बेचारा बेजुबान पालतू जानवर ।
वैसे तो अपने देश में आवारा कुत्तों के बहुत से पेरोकर हैं और न्यायपालिका में इनके अधिकारों के लिए मुकदमें चल रहें हैं । अपने देश के पशुप्रेमी आगे बढ़कर उन्हें अपनाकर उनका ध्यान रखलें तो कम से कम पशु तो बच ही जाएंगे । अब तो लग रहा है तेल लेने गए बिग बी तेल की चिकनाई में रपट लिए लगते हैं। लगता है अब तो तेल लेने गए ही गए बिग बी ।
(मुनिरका एन्क्लेव, दिल्ली)




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