लोक गायिका मालिनी अस्वथी एवं शैलेन्द्र जयसवाल प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस पर एक साल के लिए नियुक्त 

विवि की कार्यपरिषद में 59 शोधार्थियों को पीएचडी उपाधि प्रदान की स्वीकृति प्रदान की 

 कुलपति की अध्यक्ष्यता में कार्य परिषद की बैठक का आयोजन 

 मेरठ। गुरूवार को सीसीएसयू में कुलपति प्रो संगीता शुक्ला की अध्यक्षता में कार्य परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक एवं शैक्षणिक विकास से जुड़े अनेक अहम निर्णय लिए गए। जिसमें विवि ने सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी व शैलेन्द्र जयसवाल को विवि ने एक साल के लिए प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस के पद पर नियुक्त किया है। साथ ही बैठक में 59 शोघार्थियों को पीएचडी की उपाधि देने का निर्णय लिया गया। 

बैठक में कार्य परिषद की पूर्व बैठक  में 8 जनवरी 2026 के कार्यवृत्त की संपुष्टि की गई। साथ ही 18 मार्च 2026 को आयोजित विद्वत परिषद के निर्णयों को अनुमोदित किया गया। इसके अतिरिक्त परीक्षा समिति (9 मार्च 2026), वित्त समिति (17 मार्च 2026) एवं भवन समिति (18 दिसंबर 2025) की बैठकों के कार्यवृत्त को भी अनुमोदित किया गया।

कार्य परिषद द्वारा 59 शोधार्थियों को पीएच.डी. उपाधि प्रदान किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई, जो विश्वविद्यालय की शोध परंपरा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बैठक का प्रमुख आकर्षण “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस” पद पर सुप्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी एवं शैलेन्द्र जायसवाल की एक वर्ष की अवधि के लिए नियुक्ति का निर्णय रहा। मालिनी अवस्थी उत्तर प्रदेश की विख्यात लोक गायिका हैं, जिन्हें वर्ष 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया जा चुका है। अवधी, भोजपुरी, बुंदेली एवं ब्रज भाषाओं में उनके योगदान ने भारतीय लोक संस्कृति को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिलाई है। बनारस घराने की महान गायिका गिरिजा देवी की शिष्या होने के कारण उनका शास्त्रीय आधार अत्यंत सुदृढ़ है। कुलपति प्रो संगीता शुक्ला ने बताया कि  मालिनी अवस्थी के जुड़ने से विश्वविद्यालय को होने वाले प्रमुख लाभ मिलेंगे। लोक संस्कृति एवं क्षेत्रीय भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा मिलेगा। विद्यार्थियों को मंचीय अनुभव एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण का अवसर मिलने के साथ  राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर exposure में वृद्धि होगी।  सांस्कृतिक गतिविधियों, कार्यशालाओं एवं प्रशिक्षण शिविरों का विस्तार तथा  प्रदर्शन कला के क्षेत्र में रोजगारोन्मुखी मार्गदर्शन मिलेगा। 

 विश्वविद्यालय द्वारा नवाचार, उद्यमिता एवं कौशल विकास को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए शैलेन्द्र जायसवाल को भी “प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस” के रूप में नियुक्त किया गया है। शैलेन्द्र जायसवाल पूर्व में विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (Executive Council) के सदस्य रह चुके हैं, जिससे उन्हें विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संरचना का गहन अनुभव प्राप्त है। उनका विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों एवं संगठनों में दीर्घ अनुभव रहा है तथा वर्तमान में वे Srijan Sanchar के साथ लीड मेंटर के रूप में जुड़े हुए हैं।

प्रो. (प्रैक्टिस) शैलेन्द्र जायसवाल के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय में स्टार्टअप, नवाचार एवं इनक्यूबेशन गतिविधियों को नई गति मिलने की संभावना है। उनके अनुभव से विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान, उद्योग आधारित प्रशिक्षण एवं रोजगारोन्मुख कौशल प्राप्त होंगे। साथ ही, उद्योगों के साथ सहयोग, लाइव प्रोजेक्ट्स एवं शोध के व्यावसायीकरण को भी बढ़ावा मिलेगा।

 कुलपति प्रोफेसर संगीता शुक्ला ने इस अवसर पर कहा कि यह नियुक्ति विश्वविद्यालय को नवाचार एवं उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे छात्र-छात्राओं को नई दिशा एवं व्यापक अवसर प्राप्त होंगे।यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसमें कौशल आधारित शिक्षा, नवाचार एवं उद्यमिता को विशेष महत्व दिया गया है।

बैठक में कुलसचिव डॉ. अनिल कुमार यादव, वित्त अधिकारी रमेश चंद्र, परीक्षा नियंत्रक वीरेंद्र कुमार मौर्य, डिप्टी रजिस्ट्रार सत्य प्रकाश, प्रोफेसर अनिल मलिक, प्रोफेसर विजय जायसवाल, प्रोफेसर अजय विजय कौर, डॉ. यशवेंद्र वर्मा, डॉ. अनिल कुमार यादव, डॉ. प्रमोद कुमार, इरशाद मोहम्मद खान तथा प्रेस प्रवक्ता मितेंद्र कुमार गुप्ता सहित अन्य अधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे।

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