स्वच्छ अभियान के पुरोधाओं की ओर कब होगा ध्यान?


- जगतपाल सिंह
प्रदेश की डबल इंजन की सरकार ने जब प्रदेश में शासन सत्ता संभाली थी उस समय जो महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे उनमें एक एक महत्वपूर्ण कार्य जन-जन की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए "स्वच्छ भारत अभियान" का निर्णय लिया गया। देश के प्रधानमंत्री ने स्वयं हाथ में झाड़ू लेकर स्वच्छ भारत अभियान में अपनी भागीदारी निभाकर देश के जनप्रतिनिधियों सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं एवं नौकरशाही को एक आईना दिखाया। इस अभियान को देश और प्रदेश के स्वच्छकार का कार्य करने वाले लोगों ने मेहनत, लगन, श्रद्धा और निष्ठा से अपने कार्य को अमली जामा पहनाया लेकिन यहां यह कहना न्याय संगत होगा कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत जन प्रतिनिधियों, नौकरशाही और सामाजिक, राजनीतिक संस्थाओं के लोगों ने इस अभियान को शुरू शुरू में तो अपना योगदान किया लेकिन बाद में तो यह लोगों के लिए सस्ती लोकप्रियता का माध्यम बनकर रह गया।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं हाथ मेॆ झाड़ू लेकर सड़क पर झाड़ू लगाकर देश और विश्व स्तर पर चर्चा बने। प्रधानमंत्री ने एक कदम और आगे बढ़ाकर उत्तर प्रदेश प्रयागराज इलाहाबाद में लगे कुंभ में सफाई कर्मचारियों के पैर धोकर देश के सफाई कर्मचारियों को मान, सम्मान दिया देश के सफाई कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री का हृदय से आभार और धन्यवाद किया था। कोरोना काल में सफाई कर्मचारियों की सेवाओं को देखकर सरकारों ने सामाजिक राजनीतिक संस्थाओं जनप्रतिनिधियों नौकरशाही ने स्वच्छ कारों के कार्य की सराहना की लेकिन आज स्वच्छ कारों की सेवाओं का सही मूल्यांकन नहीं किया जा रहा और यह वर्ग आज शोषण का शिकार हो रहा है।
स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर करोड़ों  का घोटाला नजर आता है। उस ओर सरकारों का ध्यान नहीं जा रहा है। हेल्थ मैन्युअल एक्ट के अनुसार किसी भी नगर पालिका, नगर निगम, नगर पंचायत ,में सफाई कर्मचारियों का मानक पूरा नहीं है बल्कि लंबे समय से  सफाई कर्मचारी यो की भर्ती सरकारों द्वारा नहीं की गई है बल्कि ठेकेदारी में अल्प मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं जबकि सफाई कर्मचारी प्रतिनिधि और उनकी संस्थाएं लंबे समय से सरकार से ठेकेदारी प्रथा को बंद करवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

 देश की संसद में भी और विधानसभाओं में भी प्रश्न उठाए गए लेकिन स्वच्छ करो की नई भर्ती नहीं की गई है। सन2006 उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के शासनकाल में सफाई कर्मचारियों की संविदा कर्मियों की भर्ती की गई थी जो आज तक भी संविदा कर्मी के रूप में सफाईकर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं जबकि अनेकों बार सफाई कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने समय-समय पर प्रदेश सरकार से संविदा कर्मियों को स्थाई करने के लिए मांग उठाई लेकिन आज तक भी स्वच्छ कारों की ओर सरकार का ध्यान नहीं है। बल्कि ठेकेदारी के रूप में सफाई कर्मचारी अपने कार्य को अमली जामा पहना रहे हैं।
 ठेकेदारी के कार्य में भी सामान्य, पिछड़ी, अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति के रूप में सफाई कर्मियों को लगाया गया है और अधिकतर पालिकाओं का सर्वे किया जाए और जांच की जाए तो ठेकेदारी के रूप में कार्य करने वाले सफाई कर्मचारी अनुसूचित जाति वाल्मीकि समाज के ही आपको मिलेंगे अन्य वर्ग के भर्ती किए गए कर्मचारी सफाई का कार्य न करके अन्य कार्यों में उनको लगा लिया जाता है यहां तक की कुछ तो बिना किए ही ठेकेदारी का मानदेय उठा रहे हैं।
स्वच्छ भारत  अभियान को अंजाम देने वाले लोग अपने कार्यों को जी-जान से मेहनत, लगन, निष्ठा से कर रहे हैं जो वास्तव में सराहनीय है कुछ पालिकाओं में तो उनकी सेवाओं को तीन पालियां में भी लिया जा रहा है स्वच्छ अभियान के नाम पर अधिकारी प्रदेश सरकार से सम्मान प्राप्त करने के लिए प्रतिस्पर्धा की दौड़ में सफाई कर्मचारियों को बधुवा मजदूर बनाकर  कार्य करा रही है।
आखिर इनकी ओर कब और कौन ध्यान देगा आज भी पालिकाओं द्वारा कर्मचारियों को ग्लव्स, डमबूट, सेनीटाइज कार्य करने के औजार नहीं उपलब्ध कराए जाते यहां तक की अवकाश, अर्जित अवकाश, मेडिकल अवकाश, महिलाओं को प्रसव काल का अवकाश भी नहीं मिलता है और समय पर सफाई कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं कराया जाता। इसके बावजूद यह लोग सफाई के कार्य को मेहनत और लगन से करते हैं।

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