माधुरी निगम की कृति सीप से बिखरे मोती का भव्य विमोचन
इन्दौर। साहित्य के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय वामा साहित्य मंच के सौजन्य से एक और साहित्यिक कृति का लोकार्पण किया गया। मंच के तत्वावधान में उभरती हुई कवयित्री माधुरी निगम (मधुबन) के प्रथम काव्य संग्रह सीप से बिखरे मोती का विमोचन समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ करूणा प्रजापति द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना से हुआ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वामा साहित्य मंच की अध्यक्षा श्रीमती ज्योति जैन ने इस कृति को भावनाओं के विभिन्न मोती बताया। उन्होंने उल्लेख किया कि माधुरी जी ने पुस्तक को विभिन्न खंडों में बांटा है, जिसमें माँ, बेटी, स्त्रियाॅं, जीवन दर्शन, प्रकृति, देशप्रेम जैसे कई बिंदुओं को समेटा गया है। चूंकि वे स्वयं शिक्षिका रही हैं, इसलिए पुस्तक का समापन शिक्षक खंड से किया है।
लेखिका की पुत्री दीपा निगम ने परिवार की पाती पढ़ी और कृति को वर्षों की तपस्या तथा सपने के सच होने जैसा बताया। पुस्तक का संपादन मुकेश इंदौरी ने किया है। विमोचन मंचीय अतिथियों और परिजनों ने मिलकर किया।
लेखिका ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह कृति उनके मन के अनुभवों को समेटने का प्रथम प्रयास है। उनकी कविताएं संवेदनाओं का प्रतिबिम्ब और भावनाओं की यात्रा हैं। उन्होंने बताया कि कविताएं कभी योजनाबद्ध तरीके से नहीं लिखी गईं, बल्कि वे आत्मा की शाब्दिक अभिव्यक्ति हैं। उनके लेखन में पति ने बहुत सहयोग किया है। उन्होंने अपनी कविताओं मेरे जीवनसाथी, तुम कुछ बोले क्यों नहीं, चिड़िया सी चहकती है बेटियां और ज्योति पथ का वाचन भी किया।
काव्य संग्रह पर विस्तृत चर्चा करते हुए वामा साहित्य मंच की संस्थापिका श्रीमती पदमा राजेन्द्र ने पुस्तक के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संग्रह में 65 सकारात्मक और सहज कविताएं हैं, जो शब्दों की सीमा में नहीं बंधी हैं। उन्होंने कहा कि कविताएं अंधकार को समाप्त नहीं करतीं, पर दिशा अवश्य दिखाती हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार आदरणीय हरेराम वाजपेई ने कहा कि यह संग्रह कल्पनाओं का साकार रूप है। उन्होंने कहा, लेखन उम्र के बंधन में नहीं बंधता, यह किसी भी उम्र में किया जा सकता है। किताबें ज्यादा न हों चलेगा, लेकिन उनका कालजयी होना जरूरी है। माधुरी जी ने ऐसी ही रचनाएं रची हैं। उन्होंने सीप से बिखरे मोती को सीप से निकले मोती कहकर सराहा।
साहित्यिक संध्या का सुव्यवस्थित संचालन निरूपमा त्रिवेदी ने किया। कार्यक्रम में सह-सचिव डॉ. अंजना चक्रपाणि मंच पर उपस्थित रहीं। अध्यक्ष, मुख्य अतिथि, चर्चाकार व सह-सचिव के स्वागत व स्मृति चिन्ह भेंट करने का दायित्व दिलीप निगम, दीपा निगम, संगीता निगम, काव्या निगम, अमित श्रीवास्तव व रीतु श्रीवास्तव ने निभाया। अंत में आभार वैभव निगम ने व्यक्त किया। इस गरिमामयी समारोह में साहित्य जगत की कई नामचीन हस्तियों ने शिरकत की।


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