मेट्रो के मेरठ स्टेशन पर दिखाई देगी 1857  की क्रांति  झांकी 

अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह और मेरठ की ऐतिहासिक भूमिका को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जा रहा 

मेरठ।आगामी 22 फरवरी को मेरठ में मेरठ दक्षिण से माेदीपुरम तक मेरठ  के स्टेशनों पर 1857 की मेरठ की अंग्रेजों के खिलाफ हुई क्रांति की झलक दिखाई देगी। आजादी से पहले मेरठ में  भड़की 1857 की पहली स्वतंत्रता संग्राम की चिंगारी अब एक बार फिर रंगों के माध्यम से जीवंत  किया जा रहा  है। नमो भारत ट्रेन व मेरठ मेट्रो की दीवारों, पिलर, टिकट काउंटर के समीप 1857 की क्रांति की गाथा को भव्य पेंटिंग्स के जरिए उकेरा जा रहा है। इन चित्रों में क्रांतिकारियों का साहस, अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह और मेरठ की ऐतिहासिक भूमिका को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया जा रहा है।

 गढ़ रोड निवासी फ्रीलांस आर्टिस्ट हर्षिता वशिष्ठ ने बताया कि इन पेंटिंग्स में 10 मई 1857 की ऐतिहासिक घटना, जब मेरठ छावनी से विद्रोह की शुरुआत हुई थी को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के भी चित्र बनाकर उनकी बहादुरी को दर्शाया जा रहा है।इन पेंटिंग को उनके अलावा उड़ीसा के गोपाल नायक, कोलकाता के तुहीन क्रांति‍, राजस्थान के नरेंद्र, कन्हैय्या लाल यादव और दिल्ली के कलाकार इन पेंटिंग को बना रहे हैं। ऐतिहासिक तथ्यों का अध्ययन कर चित्रों में प्रामाणिकता बनाए रखने का प्रयास हो रहा है। ताकि यात्रियों को यात्रा के दौरान ही मेरठ के गौरवशाली इतिहास से परिचित कराया जा सके।सबसे पहले शताब्दीनगर स्टेशन पर पेंटिंग चल रही है। इसके बाद 12 अन्य स्टेशनों पर भी पेंटिंग की जाएगी।

नई पीढ़ी को 1857 की क्रांति को जानने का मिलेगा मौका

एनसीआरटीसी के अधिकारी के अनुसार, इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को 1857 की क्रांति के महत्व से अवगत कराना है। यह पहल मेरठ की पहचान को और मजबूत करेगी। जब यात्री इन स्टेशनों से गुजरेंगे तो उन्हें केवल आधुनिक परिवहन व्यवस्था ही नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की अमर गाथा भी देखने को मिलेगी।

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