स्टार्टअप और सफलता

 राजीव त्यागी 

साल 2025 स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ। अब स्टार्टअप्स को सफलता के लिए दीर्घकालिक स्थिरता और सामाजिक योगदान की कसौटी पर भी परखा जाने लगा है। दुनिया भर में स्टार्टअप्स की संख्या भले ही तेज़ी से न बढ़ी हो, लेकिन जो स्टार्टअप टिके, वे अधिक मज़बूत और व्यावहारिक साबित हुए। भारत 2025 में भी दुनिया के सबसे सक्रिय स्टार्टअप देशों में शामिल रहा। 

देश में लगभग 22,000 से अधिक नए स्टार्टअप्स पंजीकृत हुए- जो एक महत्वपूर्ण वृद्धि दर्शाता है और उद्यमशीलता की गति स्पष्ट करता है। हालांकि, बीता वर्ष भारत के लिए भी ‘छंटाई’ का वर्ष रहा- स्टार्टअप्स की संख्या में वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी, लेकिन गुणवत्ता व फोकस में सुधार दिखा। 2025 में वैश्विक स्टार्टअप परिदृश्य में भारत की स्थिति तीसरे या चौथे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में बनी रही। अमेरिका और चीन के बाद भारत को अक्सर यूरोप के साथ तुलना में रखा जाने लगा। 

भारत ने लगभग 125 यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स बनाए ( स्टार्टअप्स जिनकी वैल्यू $1 बिलियन से अधिक है)। इनमें से कई ने इस वर्ष यह मुकाम हासिल किया और ग्रोथ जारी रखी। भारत की खासियत रही कि वह केवल उपभोक्ता बाज़ार नहीं, बल्कि नवाचार और स्केल- दोनों का केंद्र बन रहा है।

 भारतीय स्टार्टअप्स अब केवल घरेलू नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ारों को भी लक्ष्य बना रहे हैं। भारत ने साबित किया कि उसका स्टार्टअप इकोसिस्टम अब किशोरावस्था से निकलकर परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है। चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन दिशा स्पष्ट है। 

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